डीघ ब्लॉक के बारीपुर गांव की तीन बस्तियों में अधिकारियों की उदासीनता से सौभाग्य योजना दुर्भाग्य में बदल गई है। बस्तियों में सौभाग्य योजना के तहत लगे तीन ट्रांसफाॅर्मर सालभर पहले जल गए। ट्रांसफाॅर्मर अब तक नहीं बदले गए।
इससे करीब 16 हजार की आबादी बिजली संकट से जूझ रही है। बिजली निगम ने सौभाग्य योजना से लगे ट्रांसफाॅर्मर को बदलने से मना कर दिया है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि ट्रांसफाॅर्मर अभी गारंटी पीरियड में हैं। इसलिए लगाने वाली संस्था ही बदलेगी। डीघ ब्लॉक का बारीपुर गांव जिले के सबसे बड़े गांवों में शामिल है।
करीब चार साल पहले गांव की तीन बस्तियों में सौभाग्य योजना के तहत 16-16 केवी के तीन ट्रांसफाॅर्मर लगाए गए थे। ट्रांसफाॅर्मर लगने के बाद गांव की गड़ेरिया की बारी, मुस्लिम बस्ती व दलित बस्ती में घर-घर बिजली के कनेक्शन दिए गए थे।
वर्षों से अंधेरे में रह रहे तीनों बस्ती के लोगों के घरों में पहली बार रात रोशनी पहुंची थी। लगभग साल भर पहले एक के बाद एक तीनों ट्रांसफाॅर्मर जल गए। इससे तीनों बस्तियों में फिर से अंधेरा छा गया। सालभर में जले ट्रांसफाॅर्मर अब तक नहीं बदले गए।
इस प्रकार बस्ती वासियों के लिए सौभाग्य योजना के ट्रांसफाॅर्मर की गारंटी दुर्भाग्य बन गई। गांव के रमजान अली ने बताया कि जले ट्रांसफाॅर्मर को 24 घंटे में बदलने का शासनादेश है। इसके बावजूद गांव की तीन बस्तियों में जले ट्रांसफाॅर्मर नहीं बदले गए।
साहब अली ने बताया कि गांव के कुछ लोग दूर से तार खिंचकर लाइट जला रहे हैं। पुरुषोत्तम नेता, फौजदार ने बताया कि बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई, पानी की आपूर्ति और रात की सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है।