डा. कपिलदेव द्विवेदी प्रज्ञावान, साधु पुरुष थे। उनके ग्रंथों से संस्कृत ही नहीं बल्कि साहित्य जगत भी लाभान्वित हो रहा है।
वह रविवार को यहां पद्मश्री डा. कपिल देव द्विवेदी के जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
विश्व भारती अनुसंधान परिषद की ओर से जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि द्विवेदी जी ने रचना के जरिए वेदों में विज्ञान और वैदिक मनोविज्ञान के नवीन संस्करण का लोकार्पण किया।
इस मौके पर वक्ताओं ने डा. द्विवेदी की रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए उसे साहित्य और संस्कृति के लिए बेजोड़ बताया। विशिष्ट अतिथि डा. कृष्णकांत शर्मा ने कहा कि संस्कृत का अध्ययन और अध्यापन संस्कृत विद्वानों के ग्रंथों के बिना संभव नहीं है।
डा. हृदयरंजन शर्मा ने कहा कि डा. द्विवेदी आचार्य और ऋषि थे। अब्दुल हादी ने कहा कि डा. द्विवेदी ने भदोही को साहित्य जगत के माध्यम से विश्व पटल पर पहुंचाया।
इसके पूर्व डा. यदूनाथ दूबे, डा. हृदयरंजन शर्मा, डा. कृष्णकांत शर्मा को डॉ. कपिलदेव द्विवेदी स्मृति विश्व भारती सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर कृष्णावतार त्रिपाठी राही, धर्मेंद्रु, डा. सगीर हसन, केशवचंद्र मिश्र, डा. राजकुमार पाठक, वाजिद अली, रमेश त्रिपाठी, पारसनाथ मिश्र, शिवनरेश मिश्र, सुरेश पांडेय, गुलाब चंद्र मौर्य, दिनेश कुमार गर्ग, घनश्याम दास गुप्ता, अरविंद भट्टाचार्य आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डा. विद्याशंकर त्रिपाठी और धन्यवाद ज्ञापन डा. भारतेंदु द्विवेदी ने किया।