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Bhadohi News: 15 करोड़ से बने आरआरसी, न कूड़ा उठा न बनी खाद, 90 फीसदी सेंटर रहते हैं बंद

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भदोही के कोल्हण आरआरसी पर बंद ताला।  संवाद
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-टू के तहत बने रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) न तो कूड़ा प्रबंधन में उपयोगी साबित हो सके और न ही इनमें खाद तैयार हो सकी। गांवों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए ये आरआरसी अब ग्राम पंचायतों के लिए ही बोझ बन गए हैं। जिले की 546 ग्राम पंचायतों में से 389 ग्राम पंचायतों में करीब 15 करोड़ रुपये से आरआरसी का निर्माण कराया गया था।
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इसके बावजूद करीब 90 फीसदी सेंटरों पर ताले लटके हुए हैं। कुछ सेंटरों के आसपास घास भी उग आई है।
सरकार की मंशा थी कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में रिसोर्स रिकवरी सेंटर स्थापित कर गांव स्तर पर कूड़ा प्रबंधन किया जाए। इन सेंटरों का मुख्य उद्देश्य अपशिष्ट पदार्थों से वर्मी कंपोस्ट और जैविक खाद तैयार करना था। इसके अलावा गांवों से कूड़ा संग्रह के लिए ई-रिक्शा भी खरीदे गए थे। हालांकि, धरातल पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। बृहस्पतिवार को हमारी टीम 10 सेंटरों की स्थिति का जायजा लेने पहुंची। इनमें औराई ब्लॉक के उमरहां और झौंवा, डीघ ब्लॉक के बलीपुर, इब्राहिमपुर और केदारपुर, भदोही ब्लॉक के कोल्हण और मूंसीलाटपुर, ज्ञानपुर ब्लॉक के गिरधरपुर तथा अभोली ब्लॉक के सेमरा और गोपीपुर शामिल रहे। डीघ के केदारपुर और औराई के झौंवा में टिनशेड उड़ चुका है।
इब्राहिमपुर में भवन जर्जर हो चुका है। अधिकांश सेंटरों पर कभी कूड़ा निस्तारण नहीं हो सका। कई सेंटरों पर ताला लगा मिला। उमरहां के सचिव संजय कुमार दूबे ने बताया कि सफाईकर्मी की नियुक्ति न होने से दिक्कत हो रही है।
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भदोही ब्लॉक के कोल्हण गांव में 10 लाख रुपये की लागत से आरआरसी बनाया गया है। दो साल पहले बने इस सेंटर के गेट पर अक्सर ताला लटका रहता है। कचरा प्रबंधन की योजना यहां कागजों तक ही सीमित है।
डीघ ब्लॉक के इब्राहिमपुर, बलीपुर और केदारपुर में 10-10 लाख रुपये की लागत से सेंटर बनाए गए हैं। गांव से अधिक दूरी पर बने ये सेंटर अक्सर बंद रहते हैं। आंधी में सेंटर का टिनशेड उड़ गया है। दो साल पहले बने इन सेंटरों पर आज तक कूड़ा नहीं पहुंचा है।
औराई ब्लॉक के झौंवा और उमरहां में भी रिसोर्स रिकवरी सेंटर दो साल से शोपीस बने हुए हैं। बिना उपयोग के ही ये जर्जर हो चुके हैं। इससे इनका उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
बड़ी ग्राम पंचायतों में आरआरसी का संचालन हो रहा है। कुछ स्थानों पर ग्राम पंचायतों की उदासीनता के कारण संचालन नहीं हो रहा है। टीम गठित कर सभी का सर्वे कराया जाएगा। जहां जो कमी होगी, उसे दूर कर सेंटरों का संचालन कराया जाएगा। - डॉ. सपना अवस्थी, डीपीआरओ, भदोही
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