भदोही। सड़क सुरक्षा सप्ताह 23 जून से शुरू हो चुका है। लेकिन इस सुरक्षा सप्ताह में भी यातायात समस्याएं दूर होंगी ऐसा कम ही प्रतीत होता है। भदोही कस्बे को ही ले लीजिए, कालीन औद्योगिक शहर होते हुए भी यहां के तीन प्रमुख चौराहों में से केवल रजपुरा चौराहे का सुंदरीकरण हो सका। बाकी दो हमेशा जाम की समस्या से ग्रसित रहती हैं। इंदिरा मिल चौराहे से लगे रेलवे ओवरब्रिज की सर्विस लेन की बात करें तो यह आए दिन होने वाले सड़क सुरक्षा सप्ताहों को ठेंगा दिखाती हैं। लोगों का कहना है कि सड़क सुरक्षा सप्ताह केवल चालान काटने और अधिक से अधिक सम्मन शुल्क वसूलने के लिए होती हैं।
भदोही शहर के हाईवे पर विवेकानंद चौराहा, इंदिरा मिल का गांधी चौक और रजपुरा का शहीद चौक प्रमुख हैं। कस्बे के अंदर की बात करें तो पकरी का फूलन देवी तिराहा, लिप्पन तिराहा दिन में हर रोज कम से कम तीन घंटे जाम की चपेट में रहते हैं। भारी वाहनों पर कोई नियम नहीं लागू हो पाने से स्टेशन रोड और मेन रोड अक्सर जाम की चपेट में रहता है। जाम से व्यापारियों का भारी नुकसान हो रहा है। स्टेशन रोड पर दो दर्जन बैंक शाखाएं होने से इस पर भीड़ पहले से ही रहती है। जब कभी जाम होता है तो व्यापारियों के घंटों नुकसान होते हैं। इस बारे में सीओ यातायात भूषण वर्मा ने बताया कि पूरे जिले में केवल एक यातायात सब इंस्पेक्टर, दो हेड कांस्टेबल और चार कांस्टेबल हैं। शासन को और तैनाती के लिए लिखा जाता है। संख्या बल तब न होने के कारण सिविल पुलिस या होमगार्ड लगाकर काम चलाया जा रहा है।
भदोही। शहर के जौनपुर बाईपास मार्ग पर तीन चौराहे हैं। विवेकानंद चौराहा, गांधी चौकी और शहीद चौक। गत वर्ष भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) से लाखों रुपये की लागत से शहीद चौक का सुंदरीकरण कराया गया था। चौक को लाल पत्थर से सुजज्जित किया गया था, जिससे चौराहे की खूबसूरती देखते ही बनती थी। चौराहे के दुकानदारों ने बताया कि कुछ माह पूर्व चौराहे से एक कार टकरा जाने से उसका गोलंबर क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद से अब तक वह क्षतिग्रस्त हालत में है।
भदोही। सड़क सुरक्षा सप्ताह आते जाते रहेंगे, लेकिन शहर के सड़कों की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ। भदोही नगर के सिविल लाइन रोड, इंदिरा मिल आरओबी की सर्विस लेन गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। सड़क की बदहाली के चलते ही इस पर गत वर्ष चार लोग दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं। पहले सड़क सुरक्षा सप्ताह के मायने होते थे कि वाहनों की जांच भी और सड़कों की दशा में सुधार भी। अब स्थिति यह अभियान केवल वाहनों की जांच और सम्मन शुल्क वसूली तक ही सीमित रह गई है। इंदिरा मिल के सर्विस लेन की तो यह दशा है कि उस पर गत वर्ष दुर्घटनाओं में चार मौतें हो चुकी हैं। बारिश में हालात ये हैं कि अब कोई मां बाप अपने बच्चों को उस सड़क की ओर जाने तक नहीं देता। कालीन निर्यातकों से लेकर व्यापारी तक सर्विस लेन के निर्माण के मांग कर रहे हैं। कई बार उद्योग बंधु की बैठकों में और कई बार लोग खुद जाकर जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद से मिल चुके हैं लेकिन अब तक स्थिति वैसे ही है।