अच्छी मानसूनी बारिश न होने से धान की फसलों में पानी की कमी लगातार बनी हुई है। इससे फसलों में कई बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है। धान के साथ मक्का, अरहर, उर्द, मूंग आदि फसलों में लगने वाले कीट और रोग से बचाव के लिए कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी रत्नेश कुमार सिंह ने बताया कि धान में संकरी और चौड़ी पत्ती खरपतवार के नियंत्रण के लिए प्रेटिलाक्लोर 50 प्रतिशत, 1.5 लीटर और एनीलोफास 30 प्रतिशत, 1.25 से 1.5 लीटर को 500-600 लीटर पानी घोलकर फ्लैटफन नॉजिल से दो इंच भरे पानी में छिड़काव करना चाहिए। दीमक और जड़ की सूड़ी के नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत को ढाई लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें।
खैरा रोग के नियंत्रण के लिए पांच किलो जिंक सल्फेट को 20-25 किलो यूरिया को एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। तना बेधक से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप को छह से आठ लीटर पानी प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। जीवाणु झुलसा और जीवाणुधारी रोग नियंत्रण के लिए स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस दो प्रतिशत दो लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें।
मक्का में तना भेदक कीट से बचाव के लिए डाईमेथोएट 30 प्रतिशत एक लीटर या क्लोरंट्रनिलिप्रोल 200 मिली या इंडोक्साकाब 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। फाल आर्मी वर्म कीट से बचने के लिए 20-25 पक्षी आश्रय (बर्ड पर्चर) और 3-4 की संख्या में प्रकाश प्रपंच लगाकर आसानी से प्रबंधन किया जा सकता है।