मवेशियों को संरक्षित करने के लिए शासन से मिले अनुदान में कर्मचारियों ने घपलेबाजी की है। ताजा मामला औराई के लक्षमणा गांव का सामने आया है। यहां पशु शेड निर्माण के नाम पर तीन लाख से अधिक की रकम खर्च कर दी गई जबकि मौके पर कुछ नहीं मिला। बीडीओ की जांच पर सीडीओ ने ग्राम विकास अधिकारी, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है।
छुट्टा पशुओं के संरक्षण के लिए जिले में 23 अस्थायीऔर दो स्थायी गौशाला संचालित हैं। इनमें पांच हजार से अधिक मवेशी हैं। ग्रामीण अंचलों में पशुपालकों की सहूलियत के लिए सरकार ने पशु शेड निर्माण के लिए डेढ़ लाख की धनराशि अनुदान पर दी है। 10 से 15 मवेशी रखने वाले पशुपालकों ने इसके लिए आवेदन भी किया, हालांकि सचिव, तकनीकी सहायक, ग्राम प्रधान संग रोजगार सेवकों की मनमानी से इसमें धांधली की गई। औराई के लक्षमणा गांव निवासी अभिषेक तिवारी और महेश दूबे ने आईजीआरएस पर प्रार्थनापत्र देकर धांधली का आरोप लगाया है। डीएम के निर्देश पर बीडीओ औराई नवीन गुप्ता ने जांच की। इसमें लाभार्थी मोलई राम, महेश दूबे और राजेश तिवारी के यहां स्थलीय जांच की गई। पाया गया कि मोलई राम के यहां एक लाख 14 हजार खर्च हो गया, जबकि पशुशेड का निर्माण नहीं मिला। राजेश तिवारी और महेश दूबे के यहां आधा-अधूरा काम मिला। जांच रिपोर्ट पर मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने सचिव संजय कुमार दूबे द्वितीय, तकनीकी सहायक एमए सिद्दीकी, रोजगार सेवक गुड्डू को नोटिस भेजकर तीन दिन में जवाब मांगा है। चेतावनी दी कि स्पष्टीकरण न देने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।