ज्ञानपुर/घोसिया। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल निषाद पार्टी ने सोमवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद के जन्मदिन को आरक्षण संघर्ष दिवस के रूप मनाकर मुख्यालय समेत तहसीलों पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। इस दौरान कार्यकर्ताओं के साथ औराई तहसील पर तहसीलदार देवेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रीय सलाहकार डा.सूर्यलाल निषाद ने राजनीति दलों को मछुआरा समाज का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। आठ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी की मांगों को मानकर वर्तमान सरकार ने पूर्व के वादों को नहीं निभाया तो पार्टी समाज के हक और अधिकार के लिए अपने दम पर रणनीति तैयार करने के लिए विवश होगी।
इस मौके पर विधानसभा प्रभारी सुभाषचंद्र निषाद ने याद दिलाया कि केंद्र और प्रदेश में काबिज सरकार के गठन में निषाद पार्टी ने जो योगदान दिया उस पर जिम्मेदारों ने वादा किया था कि 17 जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देकर उन्हें समाज की मुख्य धारा जोड़ा ही जाएगा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में जनप्रतिनिधि सहयोग करेंगे। इसका कोई सार्थक परिणाम समाज को न मिलना है और उनकी दशा बद से बदतर होती जा रही है। समाज की नाराजगी तभी दूर होगी जब राजनीतिक दलों का रुझान उनकी ओर बढ़ेगा। जिला उपाध्यक्ष सच्चेलाल निषाद ने कहा कि कांग्रेस की देन है कि 1992 में पिछड़ी जाति में शामिल कर अधिकार से वंचित कर दिया गया। समाजवादी पार्टी शासन में 17 जातियों को अनुसूचित जाति के मिलने वाले दर्जे पर कोर्ट से स्टे लेकर अपना असली चेहरा सामने करना किसी को पच नहीं रहा है। बहुजन समाज पार्टी में गरीबों के हितैषी होने का चादर ओढ़ा जाता है लेकिन जब हक की बात आती है तब नजरबंद होकर तमाशा देखा जाता है। एक दशक से दलीय उठापटक का खामियाजा अब नहीं भुगता जाएगा। समाज को राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षिक और आरक्षण के क्षेत्र में न्याय दिलाकर ही पार्टी दम लेगी।
इस अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष मिठाई लाल, रामटहल, अरविंद कुमार, डा. कुमार निषाद, चंद्रशेखर, सुशील, दयाराम, राधेश्याम, महेशचंद्र, राजकुमार, राधेश्याम, धर्मराज आदि रहे।