ज्ञानपुर नगर में ढ़लाई का सामान लेकर जा रहा ट्रैक्टर। संवाद
जिले में धड़ल्ले से ट्रैक्टरों का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। कृषि कार्य का पंजीयन कराने के बाद उससे बिल्डिंंग मेटेरियल व टेंट के सामने ढोए जा रहे हैं। इससे हादसे का डर है। परिवहन विभाग की ओर से हर दिन 10 से 15 ट्रैक्टरों का चालान किया जाता है। इसके बाद भी इसके व्यवसायिक उपयोग पर लगाम नहीं लग रही है।
जिले के परिवहन विभाग में 60 ट्रैक्टर पंजीकृत है। विभाग में पंजीकरण के उलट जिले में धड़ल्ले से 900 से अधिक चल रहे हैं। कृषि कार्य के लिए पंजीयन कराने के बाद तमाम वाहन चालक उसका व्यावसायिक उपयोग कर हैं।
परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक ट्रैक्टर का पंजीयन केवल कृषि कार्य के लिए होता है। इसका व्यवसायिक उपयेाग नहीं किया जा सकता। जिले में कृषि पंजीयन वाले 90 फीसदी ट्रैक्टर का प्रयोग धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। कभी टेंट का सामान तो कभी बिल्डिंग मेटेरियल ढोया जाता है।
कई बार तो इनका उपयोग सवारी वाहन के रूप में किया जाता है। दो माह पहले ही असनाव में ट्रैक्टर की चपेट में आकर एक महिला की मौत हो गई। इसी तरह करीब एक साल पहले ट्रैक्टर ने एक चिकित्सक को रौंद दिया था। इससे की उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।