अस्कोट में अस्पताल भवन की टूटी हुई छत
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यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी इंदिरा आवास योजना में गोलमाल करने में 52 लाभार्थी और प्रधान फंस गए हैं। दो किस्तों में पैसा मिलने के बाद तीन साल तक इंदिरा आवास पूर्ण न होने पर प्रशासन उनके खिलाफ आरसी जारी कर रहा है। करीब 36 लाख की रिकवरी के लिए विभागीय तैयारी तेज कर दी गई है। प्रशासनिक कार्रवाई की डर से सरबतखानी और इब्राहिमपुर मुसहर बस्ती के कई लाभार्थी पलायन कर गए।
हर गरीब को पक्का घर मिले, इसके लिए सरकारों की ओर से योजनाएं चलाई जा रही है। यूपीए सरकार में इंदिरा आवास तो भाजपा में प्रधानमंत्री आवास चलाई जा रही है। इसी तरह सूबे की सपा सरकार राम मनोहर लोहिया आवास योजना को चलाई। 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद भले ही इंदिरा आवास योजना को बंद कर दिया गया, लेकिन 2013-14 और 2014-15 के सत्र में जिले के छह ब्लॉकों में करीब सात हजार से अधिक आवास आवंटित किया गया।
लाभार्थियों को दो किस्तों में 70-70 हजार रुपये आवंटित हुए। करीब तीन साल गुजरने के बाद भी 52 लाभार्थी आवास पूर्ण नहीं कर सके, जबकि 170 आवास आधे-अधूरे हैं। इसमें चौरी के सरबतखानी में 25 और इब्राहिमपुर में 15 समेत अन्य गांवों में मिलाकर 52 लाभार्थियों ने पैसा मिलने के बाद भी आवास नहीं बनवाया। 52 लाभार्थियों में 45 अनुसूचित जाति के हैं। प्रशासन की सख्त चेतावनी के बाद भी लाभार्थियों ने पैसा वापस नहीं किया। आवास न बनाने वाले 52 लाभार्थियों के खिलाफ आरसी जारी की जा रही है। सरबतखानी और इब्राहिमपुर के मुसहर बस्ती के कुछ लाभार्थी तो कार्रवाई की डर से पलायन कर चुके हैं।
इंदिरा आवास योजना के 52 लाभार्थी धन मिलने के बाद भी आवास को नहीं बनवाया। सरकारी धन को मनमानी तरीके खर्च करने के लिए उनसे पैसे की वसूली होगी। ऐसे लाभार्थियों के खिलाफ आरसी जारी की जा रही है। - आरसी पांडेय, सीडीओ, भदोही