सीतामढ़ी। महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली सीतामढ़ी में लवकुश कुमारों के जन्मोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को जगह-जगह हो रहे भजन-कीर्तन से माहौल भक्तिमय हो गया। सुबह-शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर धन्य हो रहे हैं। श्री सीताधाम मंदिर में श्री राम कथा सुनाते हुए दीनबंधु दीनानाथ मौनी बाबा ने कहा कि मनुष्य चरित्र के बल पर नर से नारायण बन जाता है।
उन्होंने कहा कि जटायु गिद्ध होकर अपने चरित्र से भगवत स्वरूप को प्राप्त हो सकता है तो मनुष्य क्यों नहीं। बक्सर बिहार से पधारे राम रसिक दास जी महराज ने कथा सुनाते हुए कहा कि रामायण मानव जाति के लिए आचार संहिता है। रामायण का पहला शब्द वर्ण है और अंतिम शब्द मानव है, जो यही बताता है कि चारों वर्णों को मानव कैसे बनाया जाए। श्री रामकथा श्रवण से मन और आत्मा दोनों निर्मल हो जाते हैं। भगवान श्री राम सच्चाई के प्रतीक थे। कहा संतों की कृपा से ही भगवान का दर्शन होता है। पंडित विजय प्रकाश पांडेय ने कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान जी को सती जी परीक्षा से, सूपर्णखा समीक्षा से और स्वयंप्रभा शिक्षा से प्राप्त करना चाहती थी, जबकि सीता मइया इच्छा से और सबरी प्रतीक्षा से भगवान को प्राप्त करना चाहती थी। कहा भगवान प्रतीक्षा और इच्छा से भी प्राप्त होते हैं।