ज्ञानपुर। तीन दिन राहत के बाद बुधवार को मौसम ने एक बार फिर रंग बदला। सुबह से लेकर शाम तक रुक-रुककर हो रही बारिश और बूंदाबांदी ने ठंड बढ़ा दी। न्यूनतम तापमान तीन डिग्री लुढ़ककर 11 तक पहुंच गया। बारिश से कच्ची और पक्की सड़कों पर जलजमाव होने से आवागमन मुश्किल हो गया। ठंड की चपेट में आने से खमरिया के पूर्व सभासद चुन्नू यादव की मौत हो गई।
करीब 10 से 12 दिनों तक पड़ी ठंड के बाद दो दिनों से मौसम साफ हो गया था। दिन में धूप निकलने से गलन से लोगों को राहत मिलने लगी। बुधवार की सुबह धूप निकलने के बाद मौसम एक बार फिर बदल गया। देखते ही देखते आसमान में काले बादलों ने दस्तक दे दी। सुबह नौ बजे के बाद से दिन भर रूक-रूक्कर बारिश होती रही। इससे ठंड बढ़ने से दिन में ही लोगों को कंपकंपी छूटने लगी। बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। लोग घरों में दुबक गए। बारिश से सरसों और आलू की फसल को नुकसान पहुंचा। शाम को आसमान में धुंध छा गया। इससे घना कोहरा होने की संभावना भी बढ़ गई है। बारिश से न्यूनतम तापमान 14 से घटकर 11 जबकि अधिकतम 23 से घटकर 17 तक आ गया। अधिकतम तापमान मौसम विशेषज्ञों की मानी जाए तो आने वाले दो दिनों तक बारिश होगी। ठंड की चपेट में खमरिया के वार्ड 11 नयेपुरा निवासी पूर्व सभासद चून्नू यादव (47) की मौत हो गई।
सरसों और आलू की फसल को नुकसान
ज्ञानपुर। बेमौसम बारिश ने सरसों और आलू की फसल को नुकसान पहुंचाया है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बारिश के साथ हवा चलने से सरसों की फलियां फूटकर खेतों में बिखर जा रही है जबकि खेतों में पानी भर जाने से जमीन के अंदर तैयार आलू खराब हो जाएगी। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि अभी बारिश अधिक नहीं हुई है। गेहूं के लिए यह बारिश फायदेमंद है लेकिन जो आलू तैयार है उसको नुकसान पहुंचेगा। सरसो की फसल भी इतनी बारिश से प्रभावित नहीं होगी।
बारिश से सैकड़ो टन धान भीगा
ज्ञानपुर। बेमौसम की मार धान क्रय केंद्रो और मिलरों पर भी पड़ी है। बुधवार को बारिश होने से सुरियावां, भदोही, औराई समेत अन्य विपणन, पीसीएफ के केंद्रो पर बाहर रखी गई धान की बोरियां भीग गई। इसके अलावा मिलरों के यहां रखी धान की बोरी भी भीग गई हालांकि विभाग का दावा है कि नाममात्र धान की बोरी ही बारिश में भीगा है। जानकारों की माने तो 100 से 500 एमटी धान बारिश में भिग चुकी है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी श्याम कुमार मिश्रा ने कहा कि 80 से 90 फीसदी धान मिलरो के पास जा चुकी है, जिससे 500 से हजार कुंतल धान ही केंद्रो पर था। इतनी बारिश का असर धान की बोरियों पर नहीं पड़ेगा।