अर्जुनपुर गांव में तेज हवा से गिरी धान की फसल। संवाद
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बंगाल की खाड़ी में कम दबाव बनने का असर कालीन नगरी में भी देखने को मिला। रविवार की रात हल्की बारिश के साथ तेज हवा ने धान की तैयार फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। कई क्षेत्रों में फसल गिरने से किसानों का खासा नुकसान हुआ।
इस बार मानसून खासा सक्रिय रहा। जिसके चलते अप्रैल-मई से लेकर सितंबर तक बारिश होती रही। अक्तूबर के दूसरे पखवारे में बंगाल की खाड़ी से कम दबाव का क्षेत्र बनने से उमस और गर्मी बढ़ गई। जिससे रविवार शाम से मौसम बदला और बदली के बीच हवा बहने लगी। देर रात तेज हवा के साथ कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हुई। अभोली, सुरियावां के कई गांव में धान की फसल गिर गई। ऐसे में पैदावार प्रभावित होने को लेकर किसान चिंतित हो गए। अब भी निचले इलाकों में धान की फसलों में आधे से एक फीट तक पानी भरा है। ऐसे में माह के अंत से आलू, अगैती गेहूं, तिलहन-दलहन आदि की बुआई भी प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
अभोली ब्लॉक के बौरीबोझ निवासी उमाशंकर बिंद ने बताया कि सात बीघे धान की रोपाई किया था। अभी भी खेत में पानी भरा है। ऐसे में उसकी कटाई और ढुलाई में दिक्कतें होंगी। रामचंद्रपुर निवासी सतीश चंद्र ने बताया कि अच्छी बारिश होने से तीन बीघे में धान की रोपाई की। लगातार बारिश से फसलें अब भी डूबी है। सुरियावां ब्लॉक के अर्जुनपुर निवासी रामचंद्र पाल ने बताया कि सात बीघे धान लगाया था, जिसमें अभी डेढ़ बीघा फसल पानी में डूबी हैं। उपनिदेशक कृषि अरविंद सिंह ने बताया कि हल्की बारिश का फसल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। एकाध स्थानों पर हवा से फसल गिरी है, उससे उत्पादन पर कोई असर नहीं होगा।