मनरेगा बिल के विरोध में कलेक्ट्रेट पर धरना देते वामदल। स्रोत: संगठन
ज्ञानपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित सात मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष इंद्रदेव पाल ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) तत्कालीन यूपीए सरकार ने खेत मजदूरों के हित में पारित किया था। यह दुनिया की सबसे बड़ी योजना थी, जिसने करोड़ों खेत मजदूरों को 100 दिनों के काम की गारंटी दी थी। मौजूदा केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म करने के लिए विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण बिल ले आई है।
मांग की कि नए बिल को रोका जाए, 55 साल से अधिक उम्र के किसानों, मजदूरों को 10 हजार रुपये पेंशन दी जाए। मजदूरों को साल में 200 दिन काम और 600 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी जाए। मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, मनरेगा में पूर्ववत बजट जारी रखने की मांग की गई। मौके पर पंधारी यादव, सुशील कुमार श्रीवास्तव, शंकर, पारस बिंद, विजय गौतम आदि रहे।