ज्ञानपुर। नगरीय गरीबों को पक्का छत मुहैया कराने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना जिले में लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। जियो टैगिंग के खेल में कर्मचारी तो पास हो गए, लेकिन लाभार्थी फेल हो गए। कर्मचारियों, सभासदों से तालमेल बिठाने वाले लाभार्थी की किश्त पखवाड़े भर में मिल रहा है, लेकिन जो तालमेल नहीं बिठाया वह महीनों से चक्कर लगा रहे हैं।
भदोही नगर के रफीक अली, सलीम और चिंता देवी और घोसिया के सद्दाम, इकबाल प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी हैं। अप्रैल-मई में इन्हें प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ। पहली किस्त के रूप में 50 हजार मिल गए। दूसरी किस्त के लिए चार महीने से डूडा दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनके खाते में डेढ़ लाख नहीं पहुंचा। दो-पांच नहीं बल्कि ऐसे ढाई हजार लाभार्थी हैं, जो दूसरी किस्त के लिए दौड़ भाग लगा रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि डूडा कार्यालय की ओर से नगरों में तैनात जेई और विभाग के कर्मचारी सभासदों से तालमेल बिठाकर योजना का क्रियान्वयन करते हैं। डेढ़ लाख की दूसरी किस्त के लिए सुविधा शुल्क का इंतजाम करने वाले लाभार्थी के खाते में रकम पहुंच पाती है।
तीन वर्ष में जिले के ज्ञानपुर, भदोही, गोपीगंज, सुरियावां, नई बाजार, घोसिया और खमरिया में आवास के 15400 लाभार्थी चयनित हुए, लेकिन 10 फीसदी आवास अब तक पूर्ण नहीं हो पाए। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो 15 हजार 400 आवासों में से 1100 आवास ही पूर्ण हो पाए हैं। तीन हजार आवास कुछ दिन में पूरे होने का अनुमान है। ढाई हजार आवासों का निर्माण दूसरी किस्त के चक्कर में लटका है।
डूडा अधिकारी ऊषा त्रिपाठी ने कहा कि पहली किस्त जारी होने के बाद तय मानक तक निर्माण न पूरा करने पर लाभार्थियों को दूसरी किस्त नहीं भेजी गई। कुछ नगरों से कर्मियों की शिकायत मिली तो उन्हें हटाया गया। अब भी कुछ कर्मचारियों की शिकायत मिल रही है। उन्हें हटाया जाएगा।
क्या है जियो टैगिंग
ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री आवास, शौचालय समेत कई योजनाओं में जियो टैगिंग जरूरी है। पीएम आवास योजना में तीन किस्तों में ढाई लाख मिलता है। लाभार्थी का चयन होने पर 50 हजार और 25 फीसदी काम पूर्ण होने पर फोटो अपलोडिंग कर टैग किया जाता है। उतना काम दिखाने पर शासन से दूसरी किस्त डेढ़ लाख भेजी जाती है। उसके बाद छत तक काम पूरा होने पर तीसरी किस्त 50 हजार अवमुक्त होती है।