जिले के स्वास्थ्यकर्मी लापरवाही कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 110 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं, लेकिन यहां मरीजों को टेली मेडिसिन का लाभ नहीं मिल रहा है। कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) मरीजों के उपचार के नाम पर सिर्फ कोरमपूर्ति करते हैं।
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने करने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। कुल 110 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं, यहां सीएचओ की तैनाती है। इसके अलावा 73 हेल्थ वेलनेस सेंटर पर एएनएम की तैनाती है।
गंभीर मरीज स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचते हैं, तो सीएचओ वरिष्ठ डॉ. से टेलीमेडिसिन के जरिए सलाह लेकर बेहतर उपचार कर सकते हैं। लेकिन सीएचओ ऐसा नहीं करते हैं, वे सिर्फ मरीज को दवा देकर छोड़ देते हैं।
परेशानी होने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला चिकित्सालय जा कर दिखाने का नसीहत देते हैं। इसके साथ ही सेंटर पर प्रसव की भी सुविधा हैं। हेल्थ वेलनेस सेंटर कुछ हद तक व्यवस्थाएं तो ठीक हैं, लेकिन उप स्वास्थ्य केंद्र पर सीएचओ की लापरवाही से मरीजों को लाभ नहीं मिल पाता। वहां न तो लोगों को टेलीमेडिसीन का लाभ मिलता है। न हीं प्राथमिक उपचार किया जाता है
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सीएचसी के अधीक्षक भी उदासीन
उपस्वास्थ्य केंद्र (आरोग्य मंदिर) के निगरानी का जिम्मा सीएचसी अधीक्षक पर होता है। छह सीएचसी के अंतर्गत आने वाले 183 उप स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात सीएचओ, एएनएम की कार्यप्रणाली को लेकर हर महीने रिपोर्ट तैयार की जाती है। अधीक्षक पर इन पर मेहरबान होते हैं। जिसके कारण रिपोर्ट साफ-सुथरी होने पर आगे कुछ नहीं होता।