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पानी के अभाव में सूख रही धान की फसलें,खेतों में पड़ी दरार

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ज्ञानपुर। कई दिनों से बरसात न होने के कारण धान की फसलों पर संकट मंडराने लगा है। फसल सूख रही है और खेतों में दरारें देख दिखने लगी हैं। इससे किसानों की बेचैनी बढ़ गई है। नलकूप-नहर भी किसानों के काम नहीं आ पा रहे। इससे किसानों में रोष है।
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जिले में संचालित सैकड़ों की संख्या में नलकूप और मुख्य नहर समेत दो दर्जन से अधिक राजवाहा-माइनर से सिंचाई के लिए दशकभर पूर्व करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा कर नालियों का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन हेराफेरी करने वाले ठेकेदारों और विभागों की लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा किसानों को झेलना पड़ रहा है। मामला चाहे तहसील सदर ज्ञानपुर का हो या फिर औराई और भदोही से जुड़े गांवों का। एक भी गांव ऐसा नहीं, जहां समुचित ढंग से किसानों के खेतों तक नलकूप और नहर विभाग की नालियों से सिंचाई हो पाती हो। एक छोर से दूसरे छोर पर हुंचने वाली नालियों की दशा यह है कि या तो वह अस्तित्व खो चुकी हैं या टूटकर, अतिक्रमण के चलते जर्जर अवस्था में आ चुकी हैं। समय-समय पर सिंचाई बंधु की बैठकों में भी सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है। वीडियो कान्फ्रेंसिंग में शासन को शतप्रतिशत व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त बताया जाता है, लेकिन गांवों की वास्तविकता विभागों की कलई खोलने के लिए काफी है। दरवांसी, रामकिशुनपुर-बसहीं, ऊंज-मुंगरहा, नवधन, गोधना, मैलौना, चंदापुर, कोइरौना, बारीपुर, सीतामढ़ी, कटरा, धनतुलसी, छेछुआं-भुर्रा, कूड़ीखुर्द, इटहरा, सरायजगदीश, सुधवैं, जंगलपुर, चकमांधाता, कुलमनपुर, बड़ागांव, चौरी, अमवांखुर्द, औराई, घोसिया, खमरिया, नटवां, दुर्गागंज, पाली, अभोली, मऊरामशाला, दानूपुर, मतेथू, सुरियावां, सर्रोई आदि गांवों में यही हाल है। किसानों ने जिला प्रशासन से स्थलीय निरीक्षण कराकर जर्जर हो चुकीं नालियों को दुरुस्त कराने की मांग की।
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