ज्ञानपुर। जिले में फर्जी डिग्री के सहारे परिषदीय विद्यालयों में नौकरी करने वाले 22 शिक्षक बर्खास्त हो गए हैं। मुकदमा दर्ज कराने के साथ 10 शिक्षकों को रिकवरी नोटिस भेजी गई है।
इसमें खास बात यह है कि 22 में 11 शिक्षकों ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी प्राप्त किया था। संस्कृत को बदनाम करने वाले ऐसे शिक्षकों को अब हिसाब देना होगा।
जिले में 885 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। इसमें करीब चार हजार से अधिक शिक्षकों की तैनाती है। शासन स्तर से जरूरत के हिसाब से शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है।
एक दशक पहले नियुक्ति प्रक्रिया कागजों में चलती थी। पांच साल पहले प्रेरणा पोर्टल पर सबकुछ ऑनलाइन होने पर फर्जी अभिलेख के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों की पोल खुलने लगी।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से लेकर अन्य विश्वविद्यालयों की डिग्री संदिग्ध मिली है। सत्यापन होने पर दूसरे के अभिलेख पर नौकरी करते हुए 22 शिक्षक मिले।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2023 से लेकर मार्च 2025 तक 22 शिक्षकों को बर्खास्त किया। लेखा विभाग से वेतन की रिपोर्ट मिलने पर 10 बर्खास्त शिक्षकों के खिलाफ रिकवरी नोटिस भी जारी कर दिया।
बर्खास्त होने वाले शिक्षकों में आधे शिक्षकों ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के अभिलेख लगाए थे। इसमें पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री और बीएड के फर्जी अंकपत्र व फर्जी प्रमाण पत्र लगा मिला। इसमें नीलम मौर्य, सुरेंद्र कुमार यादव, धर्मचंद्र, संजय प्रताप सिंह, राजकुमार राय, चंद्रशेखर यादव, रामचंद्र यादव, अनुराग तिवारी, शैलेंद्र कुमार आदि शामिल है। संवाद