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दूसरों को सुकून एवं आनंदित करती है कला

Thu, 26 Feb 2015 02:03 AM IST
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
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 अनुकृति मात्र आकृति का अभ्यास है, मंजिल नहीं जिसमें चरम सुख के लिए कल्पना का सहारा लिया जाता है। कला अंत:करण से निकलकर दूसरों को सुकून एवं शांति के साथ आनंदित करती है।
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यह बातें बुधवार को काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय चित्रकला परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय कला प्रदर्शनी के समापन अवसर पर कला की मौलिकता विषय पर व्याख्यान में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. क्षमाशंकर पांडेय ने कहीं।

 उन्होंने कलाकारों की भूरी-भूरी प्रशंसा भी की। प्रदर्शनी में दर्शनशास्त्र की विभागाध्यक्ष डा. सविता भारद्वाज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रंग तरंग की तरंगे मन मुदित करती हैं।
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दीर्घा में लगी सभी कलाकृतियां अप्रतिम है। प्रदर्शनी के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि डा. क्षमाशंकर पांडेय का डा. रविंद्र कुमार ने माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा डा. रोशन प्रसाद ने अतिथियों, कलाकारों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
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प्रदर्शनी में 35 कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित हुई थीं, जो एक से बढ़कर एक थीं, प्रदर्शनी में कलाकृतियों की लोगों ने जमकर तारीफ की।
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