ज्ञानपुर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बृहस्पतिवार को ट्रॉली बैग बनाने की मटेरियल बेचने वाली फर्म के खिलाफ आदेश दिया। कोर्ट ने कंपनी को 10 हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश देते हुए पीड़ित की बकाया धनराशि चार लाख 98 हजार 733 रुपये सात फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से देने का आदेश दिया। चेताया कि दो महीने के अंदर पूरा भुगतान करने पर पूरी धनराशि नौ फीसदी वार्षिक ब्याज की दर से देनी होगी।
आयोग के रीडर ज्ञानपुर तहसील के नथईपुर निवासी प्रतिमा देवी 19 फरवरी को उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की। बताया कि वह आजीविका के लिए अपने बेटे कमलेश के साथ ट्रॉली बैग बनाने का काम करती हैं। वे गोपीगंज निवासी अपने परिचित के कहने पर नई दिल्ली के फर्म योर्स के प्रोप्राइटर राजेंद्र सरदार से कोटेशन के आधार पर ट्रॉली बैग बनाने के मटेरियल कपड़ा, रॉड, पहिया आदि के लिए पांच लाख 733 रुपये अपने खाते से चार मार्च 2025 को आरटीजीएस किया। आरोप लगाया कि विपक्षी की ओर से कोई सामान नहीं भेजा गया और गलत सूचना दी गई कि सौ पीस ट्रॉली पहिया भेजी गई और अन्य सामान स्वयं लेकर आएंगे। इस बीच उनके पति का देहांत हो गया और विपक्षी कंपनी ने केवल दो हजार का सामान भेजा।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय डे और सदस्य दीप्ति श्रीवास्तव की पीठ ने याचिका स्वीकार की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता की सेवा में कमी पाते हुए विपक्षी कंपनी फर्म योर्स पर 10 हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया। वहीं 4 लाख 98 हजार 733 रुपये सात प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया। चेताया कि दो माह में आदेश का अनुपालन नहीं हुआ तो पूरी धनराशि नौ फीसदी ब्याज के साथ देनी होगी।