ज्ञानपुर। परिषदीय विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत होने वाले कार्याें की जांच होगी। इसके लिए डायट के 35 बीएड प्रशिक्षुओं की ड्यूटी लगाई गई है। एक-एक प्रशिक्षु को 30 से 35 विद्यालयों की जिम्मेदारी सौंपी है। इसी महीने में सत्यापन कर उन्हें जियो टैग करना है। जिन स्कूलों में काम अधूरे हैं या शुरू नहीं हो सके हैं उसकी रिपोर्ट भी ऑनलाइन सबमिट करेंगे।
परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था चाक चौबंद रखने के लिए शासन स्तर से राज्य और केंद्रीय वित्त की धनराशि से कायाकल्प योजना के तहत सुंदरीकरण व अन्य व्यवस्था में सुधार की वर्ष 2017 में पहल की गई। इसमें कुल 19 पैरामीटर के तहत काम हो रहा है। करीब छह साल में 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालयों में 50 से 60 फीसदी विद्यालय 19 पैरामीटर से संतृप्त हो गए, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय हैं, जहां 10 से 12 पैरामीटर तक काम हो सका है। शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर अब सभी विद्यालयों का सर्वे कराया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से डायट में प्रशिक्षण ले रहे बीएड के 35 प्रशिक्षुओं को इसके लिए नामित किया गया है। सभी प्रशिक्षुओं को एक सप्ताह से 10 दिन में सत्यापन कर वस्तुस्थिति जियो टैग करना है। ज्ञानपुर से सटे जोरई, बैराखास, चककलूटी, नटवां सहित कई ऐसे विद्यालय हैं, जो वर्तमान में कान्वेंट को मात दे रहे हैं। ऐसे करीब 100 से अधिक विद्यालय हैं, जो पहले से काफी बेहतर हो गए हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि सत्यापन के लिए प्रशिक्षुओं की जिम्मेदारी दी गई है। दिसंबर में ही जांच कर वेबसाइट पर जियो टैगिंग करनी है।
ज्ञानपुर। परिषदीय स्कूलों में 19 पैरामीटर के कार्य भले ही शत प्रतिशत नहीं हो सका है, लेकिन जिले की रैंक सूबे में ठीकठाक ही है। सीएम डैश बोर्ड पर 16 से 19 पैरामीटर के आंकड़ों पर पांचवीं रैंक मिली है। इसे लेकर विभाग गदगद है। बीएसए का मानना है कि पंचायत राज विभाग, ब्लॉक का सहयोग मिलने से काम ठीक हुआ है। भविष्य में रैंकिंग बेहतर होगी।
ज्ञानपुर। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 19 पैरामीटर पर काम होना है। इसके तहत शुद्ध सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, विद्यालय में नल-जल की आपूर्ति, बालक इज्जत घर, बालिका इज्जत घर, बालक मूत्रालय, बालिका मूत्रालय, इज्जत घर व मूत्रालय में जलापूर्ति, इज्जत घर का टाइलीकरण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, आधुनिक रसोई घर, कक्षा के फर्श का टाइलीकरण, श्यामपट, विद्यालय की रंगाई-पुताई, दिव्यांग सुलभ रैंप व रेलिंग, कक्षाकक्ष में वायरिंग व विद्युत उपकरण, विद्यालय का विद्युत संयोजन, बच्चों के लिए डेस्क व बेंच, विद्यालय की चहारदीवारी आदि शामिल हैं।