ज्ञानपुर। जिले के एक सरकारी और छह निजी ब्लड बैंक में सिर्फ 95 यूनिट ब्लड बचा है, जबकि इसकी क्षमता 500 यूनिट की है। जिले में डोनरों की संख्या कम है। पॉजिटिव ग्रुप की मांग ज्यादा रहती है। निगेटिव ग्रुप के मरीज गिने-चुने आते हैं।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में एक सरकारी और छह निजी ब्लड बैंक हैं। जो स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हुए हैं। हर महीने विभाग की ओर से मानिटरिंग की जाती है। इनमें सबसे ज्यादा कमी निगेटिव ग्रुप के रक्त की है, जबकि पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड पर्याप्त मात्रा में है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 19 यूनिट ब्लड है, जबकि इसकी क्षमता 150 यूनिट की है। निजी ब्लड बैंकों की क्षमता 50-50 यूनिट की है। जिले में सड़क हादसा और प्रसव पीड़िता के मामलों रक्त की खपत ज्यादा होती है। डेंगू से पीड़ित होने के बाद मरीज अन्य जनपदों का रुख करते हैं। यहां ऐसी कभी जरूरत ही नहीं पड़ी कि डेंगू मरीजों को ब्लड या प्लाज्मा चढ़ाया जाए। जिले में रक्तदान शिविरों का आयोजन कुछ संस्थाओं द्वारा किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर रक्तदान शिविर आयोजित किए गए थे। जिसमें 57 यूनिट रक्तदान हुआ था। हर जरूरत मंद को रक्त दिया जाता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से हर महीने थैलेसीमिया के मरीजों को ब्लड दिए जाते हैं। कई बार समय पर रक्त न मिलने से प्रसव पीड़ित के ऑपरेशन टालने पड़ते हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक ने बताया कि सभी सरकारी विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविर लगाए जाते है। हर जरूरतमंद काे रक्त उपलब्ध कराया जाता है।