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हाकी खिलाड़ियों की तैयार हो रही नर्सरी

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ज्ञानपुर। क्रिकेट और डब्ल्यूडब्ल्यूई में विश्व पटल पर धाक जमाने वाले कालीन नगरी के होनहार आने वाले समय में भारत की हॉकी टीम में खेलते नजर आएं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। ओलंपिक, एशियन और कामनवेल्थ गेम में टीम इंडिया के बढ़िया प्रदर्शन का असर गांव के युवाओं पर भी दिख रहा है। 2019 तक जिस जिला स्टेडियम में हॉकी के प्रशिक्षण के लिए कोई नहीं दिखता था वहीं अब 10 से 12 साल के 70 बच्चे सुबह-शाम पसीना बहा रहे हैं।
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ओलंपिक में आठ स्वर्ण जीत चुकी भारतीय टीम करीब चार दशक तक लीग से भी आगे नहीं बढ़ सकी। क्रिकेट की लोकप्रियता के आगे युवा दूसरे खेलों की तरफ रुख नहीं करते थे, लेकिन गुजरे दो से तीन साल में हाकी सहित अन्य खेलों में अच्छे प्रदर्शन का असर गांव-गांव तक देखने को मिलने लगा है। सरकार की खेलो इंडिया योजना भी काफी कारगर साबित हो रही है। क्रिकेट संग दूसरे खेलों के प्रति युवाओं की दिलचस्पी इस कदर बढ़ी कि मूंसीलाटपुर स्थित जिला स्टेडियम में हर रोज 200 से 250 युवा अलग-अलग खेलों में अपनी प्रतिभा निखारने के लिए पहुंच रहे हैं। सबसे सुखद हाकी की स्थिति देखने को मिलती है। मात्र 10 से 12 साल की उम्र के बच्चे भी एक से दो घंटे तक हॉकी सीख रहे। जिला खेल अधिकारी सिराजुद्दीन ने बताया कि डेढ़ साल तक कोरोना के कारण स्टेडियम बंद रहा। जुलाई से स्टेडियम खुला। पहले महीने में 15, अगस्त में 30, सितंबर में 40 और अक्तूबर में 65 से 70 बच्चे कोच मुनौव्वर की देखरेख में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी खेल में कुछ सीखने की यही उम्र होती है। यदि बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा तो यही बच्चे कल के ध्यानचंद्र भी हो सकते हैं।
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