ज्ञानपुर। मौसम के अचानक रुख बदल लेने से ओपीडी की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। वहीं मच्छरजनित बीमारियों की बाढ़ के कारण मरीजों को सरकारी एवं निजी अस्पतालों के जनरल वार्डों में जगह नहीं मिल पा रही है। सरकारी अस्पतालों में सुबह आठ बजे से दो बजे तक पर्ची कटवाने के लिए लंबी कतार से पंजीयन संख्या में बढ़ोतरी आम बात हो गई है। निजी अस्पताल संचालक सीजन का भरपूर फायदा उठाने में जुटे हैं। जिला अस्पताल में बुधवार को ओपीडी की संख्या 1050 रही। इमरजेंसी में 20 मरीजों ने उपचार कराया। जनरल वार्ड में उल्टी, दस्त, वायरल फीवर बीमारियों से ग्रसित होकर रीमा (50) अछवर, श्यामधर (50) बरदहां, धर्मादेवी (70) बनपुरवां, नेहा (4) जयसिंहपुर, राजकुमार (28) कंसापुर, संजय (30) कांवल बेड पर पड़े रहे।
गत दिनों सप्ताह भर हुई झमाझम बारिश के रुकने के बाद नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकासी के अभाव में मच्छरों का प्रकोप तेजी के साथ बढ़ा। जिसकी चपेट में आकर लोग उल्टी, दस्त, बुखार, पेट दर्द आदि जैसी बीमारियों से ग्रसित होकर अस्पतालों की शरण ले रहे हैं। दिन में गर्मी और रात में ठंड का असर प्रभावी होने से मौसमी बीमारियों ने भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। सीएचसी गोपीगंज, औराई, डीघ, कटरा, सुरियावां, भदोही, पीएचसी जंगीगंज, दुर्गागंज, चौरी, अभोली में मरीजों की संख्या में अधिक बनी हुई है। उधर पड़ाव गोपीगंज, मिर्जापुर रोड, बस स्टैंड, माधोसिंह, खमरिया नगर, जंगीगंज, सुभाषनगर, दानूपुर बाजार, कोइरौना आदि धनतुलसी मोड़ पर संचालित निजी अस्पतालों में मरीज उपचार के नाम पर आर्थिक शोषण के शिकार होते रहे। वहीं सरकारी और निजी अस्पतालों से कोसों दूर रहने वाले ग्रामीण अंचलों में नीम-हकीम भी सीजन का भरपूर फायदा उठाकर मरीजों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
जाम के झाम में उलझा रहा जिला अस्पताल का मुख्य गेट
ज्ञानपुर। मौसम के उतार-चढ़ाव को लेकर फैल रहीं तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित होकर लोग जिला अस्पताल पहुंचने में पसीना छोड़ रहे हैं। बुधवार को कुछ इसी तरह का नजारा मुख्य गेट पर देखने को मिला। जहां पुरानी बाजार मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण के बीच छोटे-बड़े वाहनों के घुस जाने से जाम लगा रहा। पुलिस सबकुछ देखते और जानते हुए भी जाम को बढ़ा रहे वाहनों को हटाने-बढ़ाने की जहमत नहीं उठाती। भदोही-ज्ञानपुर मार्ग स्थित केएनपीजी कॉलेज से दुर्गागंज रोड तिराहा तक सुबह से शाम तक जाम ही जाम की स्थिति बनी रही।