धान की खरीद को गति देकर किसानों की उपज को समय से समर्थन मूल्य पर खरीद कराने का दावा भले ही किया जाता है, लेकिन कालीन नगरी में इसकी रफ्तार धीमी है। ऐसे में अब अधिकारियों को चिंता सताने लगी है कि निर्धारित लक्ष्य पूर्ण होगा भी या नहीं। यदि पूर्ण होगा भी तो काफी चुनौतीपूर्ण है। क्योंकि करीब तीन महीने का समय बीतने जा रहा है और महज 41.43 फीसदी से कुछ ज्यादा खरीद हुई है। 28 फरवरी तक खरीद होनी है। यानी अब 33 दिन का समय बचा है ओर 58 फीसदी से ज्यादा खरीद करनी है। अब तक 43 केंद्रों पर दस हजार किसानों से खरीद की गई है। वहीं बोरा आदि की समस्या भी बनी है।
जिले के किसानों से धान की खरीद ठीक ढंग से कराने के लिए शासन ने यहां एक लाख 27 हजार 900 टन का लक्ष्य निर्धारित किया। इसके लिए शुरूआत में 46 केंद्र खोले गए। इनमें से तीन चले ही नहीं। बाद में 12 और बंद कर दिए गए। कुछ दिन पहले तक 30 केंद्रों पर खरीद करायी जा रही थी। सूत्रों की मानें तो एक नवंबर से शुरू हुई खरीद की गति सुस्त होने पर पुन: 43 केंद्रों पर खरीद करायी जा रही है। विपणन विभाग के अनुसार अब तक करीब 10 हजार किसानों से खरीद की गई, जबकि 17 हजार से अधिक किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। कुल 53 हजार टन की खरीद हुई है।