सुप्रिया ने भले ही इसे सामान्य तरीके से लिखा हो, लेकिन उसे पढ़ने के लिए माइक्रोस्कोप की जरूरत पड़ती है। इसके पूर्व उन्होंने एक पोस्टकार्ड पर किष्किंधा और एक पर सुंदर कांड लिखा था।
आजमगढ़ निवासी गुलाब चंद्र बरनवाल की बेटी सुप्रिया हमेशा कुछ अलग करने के अलावा धार्मिक किताबों में रुचि रखती हैं। उन्होंने 2001 में एक पोस्टकार्ड पर दुर्गा चालीसा, हनुमान चालीसा, विंध्यवासिनी चालीसा और राम चालीसा लिखा।
देवनाथपुर निवासी अंजनी कुमार बरनवाल संग सात फेरे लेने वाली सुप्रिया का हौसला ससुराल वालों ने भी बढ़ाया।
2004 में सुप्रिया ने एक पोस्टकार्ड पर सुंदर कांड लिखा। उन्होंने इसी वर्ष अगस्त और सितंबर महीने में रामायण के उत्तर कांड को दो पोस्टकार्ड में उकेर दिया।
इसमें 16 हजार शब्द, 58 छंद, 17 सोरठा, 195 दोहा, 595 चौपाईयां समाहित हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान सुप्रिया ने बताया कि हाईस्कूल से लेकर स्नातक तक वह छोटे-छोटे शब्द लिखती थीं। उनकी इच्छा है कि वो छोटे शब्द लिखकर गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल हों।