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कोविड जांच को लेकर गांवों में लापरवाही

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ज्ञानपुर। कालीन नगरी के ग्रामीण इलाकों में भी कोरोना जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जांच और इलाज न होने से रोजाना कई लोगों की जान भी जा रही है। गांवों में न सैनिटाइजेशन हो रहा है न दवा का छिड़काव हो रहा है। शुरूआती दौर में सर्दी-बुखार को वायरल फीवर मान कर उपचार कराते हैं, गंभीर होने पर जांच होती है लेकिन तब तक देर हो जाती है। अब जिले में मिलने वाले संक्रमितों में 80 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों के रहते हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर जानलेवा हो गई है। हल्की सर्दी, खांसी, बुखार जैसे लक्षण के अलावा बिना लक्षण के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। दोहरे मौसम मेें वायरल संक्रमण के साथ ही वायरस और भी घातक हो गया है। पंचायत चुनाव के कारण गांवों में तेजी से फैले वायरस ने स्थिति को विकट बना दिया है। सरकारी आंकड़ों में भले ही मौतों की संख्या 90 तक पहुंची है जबकि हकीकत हर गांव में माह भर के अंदर आठ से 10 मौतें हो चुकी हैं।
तेजी से फैलते संक्रमण के बाद भी लोग सचेत नहीं हो रहे हैं। जिले के अधिकतर गांवों में घर-घर लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, लेकिन वायरल फीवर मानकर वह मेडिकल या झोलाछाप से दवा लेकर ठीक होने की उम्मीद लगाए रहते हैं। कोरोना जांच के जहमत से सभी बचना चाहते हैं। इस दौरान न तो सतर्कता बरती जा रही है और न ही लोग सजग हैं। सभी बेखौफ बने हुए हैं। सीतामढ़ी क्षेत्र के शिक्षक विंध्यवासिनी शुक्ला समेत 11 शिक्षक-शिक्षामित्र, एक सहायक निर्वाचन अधिकारी संग कई पूर्व प्रधानों की जान जा चुकी है। ज्ञानपुर मुख्यालय से सटे भुड़की गांव में कोरोना से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। यह तो एक बानगी भर है। जिले में करीब-करीब हर गांव में कोरोना ने मौत का खेल खेला है।
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कोरोना संक्रमण के रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से हर गांव में बनी निगरानी समितियां सिर्फ कागजों पर ही संचालित हैं। जिले के 546 गांवों में बनी समितियों को महानगरों से आने वाले लोगों की सूचना और कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आए लोगों की जानकारी साझा करनी थी, लेकिन यह समितियां कोई काम नहीं कर रही हैं। ग्रामीण अंचलों में हो रही मौतों के बाद भी हर सीएचसी पर गठित टीमें गांव में नहीं पहुंच रही है। सुरियावां और औराई की गठित टीमें कुछ गांवों में जरूर पहुंच रही है, लेकिन अधिकतर गांव उनसे भी छूट गए हैं। कोरोना के पहले लहर में टीम गांवों में शिविर लगाकर लोगों की जांच करती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है।
डीघ ब्लॉक के तिलंगा गांव में दो दिन के अंदर 250 से अधिक लोगों की जांच हुई। इस दौरान 15 से अधिक लोग पॉजिटिव मिले। इसमें एक ही परिवार के 10 लोग शामिल रहे। कोविड जांच अगर सभी गांवों में हो तो बड़ी संख्या में संक्रमित मिलेंगे।
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