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कंटेनमेंट जोन में लापरवाही अब पड़े

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ज्ञानपुर। कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के बीच प्रशासनिक लापरवाही मुश्किलें बढ़ा रही है। संक्रमित मरीज बढ़ रहे हैं, मगर प्रभावित इलाकों में उस हिसाब से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बैरिकेडिंग की मॉनीटरिंग भी ठीक से नहीं की जा रही। मनमाने ढंग से लोगों का आवागमन हो रहा है। संक्रमण प्रभावित इलाकों में भी लापरवाही का आलम है। इससे आने वाले दिनों में स्थितियां विकट हो सकती हैं।
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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के रोकथाम को लेकर प्रशासन की ओर से तमाम दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर सब राम भरोसे ही चलता है। यही वजह है कि मई और जून में मिलने वाले अधिकतर संक्रमित प्रवासी रहे, लेकिन अब स्थानीय लोग भी वायरस का शिकार होने लगे हैं। रविवार को चिकित्सक समेत मिले आठ पॉजिटिव की कोई ट्रेवेल हिस्ट्री नहीं रही। सभी किसी न किसी के संपर्क में आकर ही संक्रमित हुए। शुरुआती दिनों में प्रशासन ने सतर्कता दिखाई, लेकिन अब जैसे-जैसे स्थिति विकट हो रही है तो प्रशासन भी सुस्त हो चुका है। कोरोना वायरस संक्रमितों के गांव में बैरिकेडिंग से लेकर देखरेख में भी लापरवाही दिखती है।
ज्ञानपुर के जखांव, औराई के दलपतपुर और सुरियावां के कैड़ा में रविवार को मिले संक्रमितों के गांव में स्थानीय लोगों ने बैरिकेडिंग की। कहीं भी प्रशासनिक अमला नहीं पहुंचा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमितों से संपर्क में आए लोगों की जांच का दावा किया जाता है, लेकिन गिने-चुने लोगों का स्वैब ही जांच के लिए भेजा जाता है। सबसे बड़ी लापरवाही तो डेढ़ माह पूर्व सामने आई थी जब मुख्यालय से सटे सरपतहां गांव की पाली बस्ती में एक अधेड़ की मौत के बाद उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। बस्ती के लोग स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से जांच के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन उनका स्वैब जांच के लिए नहीं भेजा गया। करीब पखवारे भर बाद डीएम ने फटकार लगाई तो स्वैब जांच को भेजा गया। जिले में 42 कंटेनमेंट जोन हैं, जहां पूरी सतर्कता नहीं बरती जा रही है।
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