सीतामढ़ी में महिलाओं की सुरक्षा के साथ संवाद के लिए विशेष रूप से काम करने की आवश्यकता है। हर दिन यहां आने वाले 15 हजार पर्यटकों में नौ हजार महिलाएं और छात्राएं हैं।
ऐसे में उनकी सुरक्षा और संरक्षा के लिए इंतजाम नाकाफी है। खासकर घाटों पर स्नान के बाद महिलाओं को असहज स्थिति होती है। वहां चेजिंग रूम के अलावा अन्य प्रसाधन की समुचित इंतजाम करने की जरूरत है।
जगत जननी माता सीता के द्वितीय वनवास काल की गौरवपूर्ण गाथाओं को संजोए सीतामढ़ी के मंदिरों, आश्रमों में माता सीता जी की दिव्य व भव्य मूर्तियां इस बात की साक्षी हैं कि यहां की पावन स्थली में मातृ शक्तियों का स्थान प्रमुख है, लेकिन इस स्थल का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है।
सीतामढ़ी में दुनिया का इकलौता भव्य व विशाल दो मंजिला मंदिर है। जिसके दोनों तल में मां सीता की अलग अलग मुद्राओं में दिव्य मूर्तियों का दर्शन मन मस्तिष्क को सम्मोहित करने वाली है।
सीतामढ़ी में प्रतिदिन देश विदेश के लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं और सैलानियों के आगमन होता है। जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक रहती है।
सीतामढ़ी के चतुर्दिक विकास के साथ रामायण की रचना स्थली को प्रदेश के रामायण सर्किट में जोड़कर पर्यटन केंद्र बनाने की मांग मातृ शक्तियों ने की है। सीतामढ़ी के कण कण में माता सीता जी विराजमान हैं।