जिले में नाग पंचमी का पर्व सोमवार को परंपरागत तरीके से मनाया जाएगा। इस साल अद्भुत संयोग बन रहा है। सावन के सोमवार को महादेव और नाग देवता की एक साथ पूजा होगी। करीब दो दशक बाद यह संयाोग बन रहा है।
नाग पंचमी का पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन नागदेव की पूजा कर उन्हें दूध पिलाया जाता है, जिससे लोगों को पुण्य मिलता है। आचार्य संदीप पांडेय ने बताया कि सावन माह के सोमवार का दिन वैसे भी भगवान शिव का है। इसी दिन नाग पंचमी होना संयोग की बात है। विधि विधान से पूजा-अर्चन करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं, सारी मनोकामनाएं पूर्ण हाेती हैं। डुहियां भावसिंहपुर निवासी आचार्य दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि सावन में सोमवार के दिन नाग पंचमी का पर्व पड़ना विशेष फलदायी माना जाता है। सुबह नाग देवता को दूध लावा चढ़ाने के साथ शाम को विधि विधान से भगवान शिव और देवी गौरी की स्तुति करनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर नाग पंचमी को लेकर गांव के अखाड़ों में भी तैयारी होती है। इस दिन कबड्डी, कुश्ती में युवा जोर आजमाईश करते हैं। कई स्थानों पर कजली मुकाबलों का भी आयोजन किया गया है।
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नाग पंचमी की पूजन विधि:
आचार्य संदीप पांडेय ने बताया कि पूजा करने के लिए नाग देवता की फोटो या मिट्ट़ी की सर्प मूर्ति को लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें। इस पर हल्दी, रोली, चावल और फूल चढ़ाकर नागदेवता की स्तुति करें। बताया कि सर्प देवता को कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर अर्पित करें। पूजन करने के बाद सर्प देवता की आरती उतारें, अंत में नाग पंचमी की कथा अवश्य सुनें।