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ज्यादातर लोगों को बैंकों से मायूस लौटना पड़ा

Fri, 25 Nov 2016 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
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ज्ञानपुर नगर में एटीएम पर लगी लंबी कतार।
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नोटबंदी के पखवारेभर बाद भी आम आदमी को पैसे की किल्लत से छुटकारा नहीं मिल सका। खाते में पैसा होने के बावजूद लोगों के सामने सामान्य जीवनचर्या को चलाने के लिए भी मुश्किलों का पहाड़ खड़ा हो गया है। बृहस्पतिवार को भी बैंकों और एटीएम पर सुबह से लेकर शाम तक कतारें तो लंबी-लंबी लगतीं रहीं, लेकिन ज्यादातर लोगों को सिवाय मायूसी के और कुछ हाथ नहीं लगा। अधिसंख्य लोगों को मनमाफिक रकम बैंक से नहीं मिली। लोग अपने ही पैसे के लिए बैंक काउंटरों पर गिड़गिड़ाते          दिखे। कई काउंटरों पर घंटों            खड़े रहने के बाद पहुंचे लोगों को बताया गया कि नकदी खत्म हो          गई है।  
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पांच सौ एक हजार के नोट बंद करने के मोदी सरकार के फैसले का कालेधन और भ्रष्टाचार पर चाहे जो प्रभाव पड़े, लेकिन जनसामान्य का जीवन बेपटरी जरूर हो गया है। पखवारेभर से लगातार पैसे के लिए जलालत झेल रहे लोग बृहस्पतिवार को भी जिले के बैंकों और एटीएम पर कतार में खड़े दिखे। पूरे दिन के इंतजार के बाद मिले भी तो दो से चार हजार रुपये। ज्यादातर बैंकों ने नकदी न होने का रोना रोते हुए हाथ खड़े          कर दिए। 
जिला मुख्यालय से लगे लखनो गांव के अशोक दुबे नगर के बैंक ऑफ बड़ौदा में दस हजार रुपये का चेक भरकर निकालने के लिए पहुंचे तो दो बार बाद में बुलाने के बाद शाम को बैंक अधिकारियों ने बताया कि कैश नहीं है, केवल चार हजार रुपये ही मिलेंगे। 
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इस पर पिता के साथ पहुंचे दुबे मायूस हो गए। कहा कि जरूरत के वक्त अपना ही पैसा काम नहीं आ रहा है। किससे मांगने जाएं, सभी की हालत एक समान है। जिन परिवारों के पास पहले से कुछ नकदी थी, धीरे-धीरे वह भी खत्म हो चली है, लेकिन बैंकों और एटीएम पर करेंसी की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही। ऐसे में तमाम लोग इस समस्या को लेकर चिंतित नजर आए। 
इसी तरह ज्ञानपुर के सतीश कुमार ने कहा कि पहले से घर पर जो फुटकर पैसे थे, वह खत्म होने वाले हैं। बैंकों और एटीएम पर मारामारी मची है। कैसे परिवार का खर्च चलेगा, सोचकर चिंता हो  रही है।
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