वरुणा और मोरवा नदी में उड़ रही धूल
जिले में गंगा की सहायक नदियां प्रदूषण और अतिक्रमण की जद में आकर अस्तित्व खोती जा रही हैं। स्थिति यह हो चुकी है कि अप्रैल में ही जीवनदायनी वरुणा और मोरवा नदी में धूल उड़ रही है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। नदियों में पानी न होने से जंगली जानवर पानी की तलाश में भटक कर बस्तियों की ओर रुख करने लगे हैं।जल दोहन से पृथ्वी का जलस्तर भी लगातार खिसकता जा रहा है। गंगा की सहायक नदियों की सफाई आदि न होने की वजह से उनका दायरा कम हो रहा है।
सिकुड़ते दायरे के चलते मार्च से सितंबर तक करीब छह माह तक वरुणा और मोरवा नदियां सूख जाती हैं। गर्मी में दोनों नदियों में धूल उड़ती है। इलाहाबाद जिले की फूलपुर तहसील के मैलहन तालाब से निकलकर भदोही और जौनपुर के रास्ते 162 किलोमीटर की यात्रा करके वरुणा वाराणसी पहुंचती है। भदोही जिले में तकरीबन 35 किमी लंबी वरुणा हजारों किसानों की फसल सिंचाई और पशु-पक्षियों जीवन का आधार बनती है।
लेकिन, आसपास के जिलों में अतिक्रमण, जगह-जगह जलप्रवाह को बांधने और सिल्ट सफाई न होने के कारण जिले में वरुणा में एक बूंद पानी नहीं है। वरुणा के दोनों तटों पर अतिक्रमण कर इमारतें बना ली गईं हैं। भदोही एवं आसपास के क्षेत्रों का कालीन का कचरा भी सीधे वरुणा में गिराया जा रहा है। भदोही में मोरवा की भी कमोबेश यही स्थिति हैा रसायनयुक्त पानी भी गिर रहा है।