फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पड़ती जाती है तारीख पर तारीख

Wed, 27 Apr 2016 01:44 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले के न्यायालयों में 32499 मुकदमे लंबित हैं। इनमें से 12855 मुकदमे दीवानी  के हैं, जबकि 19644 मुकदमे फौजदारी न्यायालय में विचाराधीन हैं। मुकदमों की सुनवाई छुट्टियां, हड़ताल और कानून की कमजोर कड़ी के जरिए टालू जुगाड़ की भेंट चढ़ गईं है। कुछ मामले वर्षों से कानूनी पेचदगियों में उलझकर न्यायालय का वक्त जाया करने के साथ-साथ अन्य मुकदमों की सुनवाई भी प्रभावित कर रहे हैं। लिहाजा तमाम वादकारी वर्षों से कचहरी का चक्कर काटते फिर   रहे हैं। 
विज्ञापन

दीवानी में कहावत है कि दादा मुकदमा दाखिल करता है और पोता फैसला लेता है। लेकिन, यह प्रवृत्ति अब फौजदारी में भी हावी होने लगी है। कानून के जानकारों के मुताबिक आम आदमी को यह जानकर ताज्जुब होगा कि अपराधी का पोता भी बहुत दिन बाद जान पाता है कि उसके दादा को किसी अपराध की सजा मिली है। जानकार बताते हैं कि मुकदमों के विलंबित होने के पीछे बड़ी वजह यह है कि न्यायिक प्रक्रिया का जितना उपयोग आम आदमी को न्याय दिलाने के लिए होता है, उससे कहीं ज्यादा उपयोग एक खास आदमी न्याय के दंड से बचने के लिए कर लेता है। 
तीन मौकों पर देनी पड़ती है दरख्वास्त 
एक न्यायिक अधिकारी के मुताबिक केवल फौजदारी मुकदमों की बात की जाए तो एक मुकदमे के विचारण के दौरान किसी भी अपराधी को तीन अवसर पर            मुक्त कर देने के लिए            दरख्वास्त देनी पड़ती है। इन अवसरों पर कोई भी एक पक्ष अगर ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाता है तो निचली अदालत की कार्यवाही रोक दी जाती है। इसके चलते भी मामले लंबित होते जाते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें