ज्ञानपुर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जिले में गैर पंजीकृत पैथालॉजी सेंटर की भरमार हो गई है। जिले में 200 पैथालॉजी सेंटर में से मात्र 42 ही पंजीकृत हैं। 158 पैथालॉजी सेंटर बिना पंजीकरण के ही चल रहे हैं। जिले में नियमों की अनदेखी करने वाले पैथालॉजी सेंटर एवं कलेक्शन सेंटर का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। गांवों-कस्बों तक कहीं एक कमरे में तो कहीं संकरी गलियों में यह सेंटर चल रहे हैं। अप्रशिक्षित हाथों में सेंटरों की कमान है। इससे मरीजों को सही रिपोर्ट नहीं मिलने से अक्सर परेशान होना पड़ता है।
जिले में दो जिला अस्पताल, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर खून आदि की जांच की सुविधा होती है, लेकिन अधिकतर स्वास्थ्य केंद्रों पर खामियों के कारण अक्सर जांच नहीं हो पाती। इससे मरीजों को निजी सेंटरों की ओर जाना पड़ता है। वैसे तो जिले में 42 पैथॉलाजी सेंटर पंजीकृत हैं। इन सेंटरों पर 300 से 350 रुपये जांच कराने के नाम पर लिया जाता है। जिसमें डॉक्टर का कमीशन भी होता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मरीज को दवा दी जाती है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक कलेक्शन सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं। इसे अप्रशिक्षित कर्मी चला रहे हैं। दुर्गागंज, औराई, सुरियावां, भदोही, चौरी, जंगीगंज, ऊंज, अभोली, गोपीगंज, मोढ, गडेरियापुर सहित विभिन्न बाजारों में अवैध कलेक्शन सेंटर चल रहे हैं। ये सेंटर ब्लड सैंपल तो लेते हैं। लेकिन उचित ढंग से रखरखाव नहीं करते हैं। क्लेशन संचालक खुद ही रिपोर्ट बनाकर देते हैं। इसी के आधार मरीज को दवा दी जाती है। गलत दवा के सेवन से करने से तमाम तरह की बीमारी हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करता है।
कोट
हर साल पैथालॉजी सेंटरों की जांच की जाती है। जहां खामियां मिलती है वहां कार्रवाई होती है।
डॉ. एसके चक,सीएमओ