जिले में बालू खनन पर रोक है, लेकिन गंगा घाटों पर अवैध तरीके से बालू खनन जारी है। खनन विभाग की सख्ती के दावे की रात में पोल खुल जाती है। अंधेरे में गंगा से बालू निकालकर बेचा जा रहा है। रविवार को खनन विभाग की टीम ने अवैध बालू खनन करने वाले तीन ट्रैक्टरों को सीज किया। इसके पहले टीम ने बुधवार को भी बेहरासपुर गंगा घाट पर एक ट्रैक्टर को सीज किया था।
जिले में गंगा को कछुआ अभयारण्य घोषित किया गया है। यहां पर गंगा में मछली मारना और तटीय इलाकों में गंगा नदी से 500 मीटर की दूरी पर खनन प्रतिबंधित है। इसके बाद भी रामपुर, गुलौरी समेत अन्य प्रमुख गंगा घाटों पर बालू का कारोबार चल रहा है। पिछले कई दिनों से रामपुर गंगा घाट पर अवैध रूप से बालू की खनन की शिकायत अधिकारियों को मिल रही थी। रविवार को पुलिस बल के साथ खनन अधिकारी अभिषेक कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने बालू लदे तीन ट्रैक्टर को सीज कर दिया। इसके बाद काफी संख्या में लोग थाने पर ट्रैक्टर छुड़ाने के लिए डटे रहे। कुछ सफेदपोश भी मौके पर आए, लेकिन कार्रवाई होने के कारण वे लौट गए। यही नहीं रामपुर घाट के सटे गुलौरी गंगा घाट पर भी बालू खनन की शिकायत मिल रही है, लेकिन अभी तक वहां कोई कार्रवाई नहीं की गई।
दुकानों में हो रहा खनिजों का भंडारण
ज्ञानपुर। गोपीगंज, भदोही, ऊंज, बाबूसराय, धनतुलसी, सीतामढ़ी आदि क्षेत्रों में दुकानों में खनिज पदार्थों का भंडारण किया गया है। जानकारों का कहना है बगैर लाइसेंस कहीं भी खनिजों का भंडारण और परिवहन नहीं किया जा सकता है। अवैध भंडारण करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। खनन अधिकारी अभिषेक सिंह ने कहा कि 30 से अधिक दुकानदारों ने लाइसेंस लिया है। अवैध भंडारण कराने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान
ज्ञानपुर। गंगा में अवैध बालू खनन से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। आम जनजीवन भी प्रभावित है। सड़कों पर बिखरे बालू से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा उड़ती धूल से लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा ओवरलोड वाहनों से आए दिन दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।