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करोड़ों खर्च,नहीं पूर्ण हो सका कोनिया फीडर का कार्य

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सीतामढ़ी। विद्युत उपकेंद्र सीतामढ़ी के अंतर्गत कोनिया क्षेत्र की बदलहाल विद्युत व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर विभाग ने विद्युत उपकेंद्र सीतामढ़ी से धनतुलसी तक नए फीडर का निर्माण का कार्य दो वर्षों में भी पूरा नहीं हो सका है। यही नहीं नए फीडर के लिए बनाई गई हाईटेंशन लाइन के खंभे और तार कई जगह टूट कर जमीन पर गिरे गए हैं। फीडर के निर्माण कार्य में लगे ठेकेदारों की मनमानी का खामियाजा कोनिया क्षेत्र के उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारी नए फीडर को चालू करने के लिए प्रयास में हैं। तीन ओर गंगा नदी से घिरे कोनिया क्षेत्र के दर्जनों गांवों की बिजली आपूर्ति सीतामढ़ी उपकेंद्र के माध्यम से होती है। उपकेंद्र पर अत्यधिक लोड के साथ काफी पुराने कोनिया फीडर के तार, खंभे और अन्य उपकरण जर्जर दशा में हैं, जिसके कारण पूरे कोनिया की बिजली व्यवस्था बेपटरी हो चली है। तमाम प्रयासों के बाद विभाग ने कोनिया की बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नए फीडर की मंजूरी दी। लगभग दो वर्षो पूर्व विभाग के एमडी कार्यालय से नए फीडर के लिए टेंडर जारी हुआ जो एक कंपनी को मिला ठेकेदार ने सड़क के किनारे किनारे खंभो को गाड़ कर तार लगवा दिया आरोप है कि निर्माण कार्य में मानक की अनदेखी की गई है। जिस फीडर को छह माह में चालू करने का दावा किया जा रहा था, वह दो वर्षों बाद भी पूर्ण नही हो सका है। इस बारे में विभाग के एसडीओ दिलीप पटेल का कहना है कि जगह जगह खंभे टूट गए हैं। ठेकेदार के माध्यम से नए फीडर को जल्द ही चालू करने का प्रयास किया जा रहा है। एक्सईएन मनोज कुमार सिंह ने कहा कि स्थलीय निरीक्षण कराकर फीडर को अंतिम रुप दिया जाएगा और लापरवाही बरत रही कार्यदायी संस्था के खिलाफ भी लिखापढ़ी की जाएगी।
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मानक की अनदेखी बनेगी अनहोनी का कारण
सीतामढ़ी। विद्युत उपकेंद्र सीतामढ़ी से धनतुलसी तक नए फीडर के निर्माण में ठेकेदारी व्यवस्था में मानक का जमकर दुरुपयोग किया गया है। जंगीगंज धनतुलसी मार्ग के पटरी के किनारों पर गाड़े गए हाईटेंशन लाइन के खंभे और तार इतने बेतरतीब और टेढ़े-मेढ़े गाड़े गए है जो भविष्य में दुघटना के कारण बन सकते हैं। जानकारों का कहना है कि हाई टेंशन के खंभें और तार बिल्कुल सीधी लाइन में होने चाहिए, लेकिन इस लाइन में काफी गड़बड़ झाला है। यही नहीं इस लाइन से सड़क के किनारे हरियाली पर भी संकट आने वाला है लाइन को चालू करने में सड़क के किनारे के सैकड़ों हरे वृक्षों को या तो काटना पड़ेगा या पेडों की छंटाई करनी पड़ेगी।
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