ज्ञानपुर। कानपुर के बिकरु गांव में दबिश देने गए आठ पुलिसकर्मियों की हत्या ने जहां पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है, वहीं पुलिस-प्रशासन को कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन लाने का संदेश भी दिया है। कानपुर की घटना के मद्देनजर जिले की पुलिस भी अलर्ट हो चुकी है। यहां भी कई ‘विकास दूबे’ छिपे हैं, जो सत्ता परिवर्तन के साथ ही चोला बदल लेते हैं। माननीयों की कृपा से उनका कारोबार बेरोकटोक चलता रहता है।
मखमली कालीनों के लिए विश्वप्रसिद्ध कालीन नगरी में भी कई अपराधी प्रवृत्ति के लोग सियासी संरक्षण का चोला ओढ़कर छिपे हैं। अब तक सत्ता और पुलिस के संरक्षण में उनका सारा धंधा चल रहा है। पुलिस कार्रवाई न हो, इसलिए सरकारें बदलने के साथ ही नेताओं से तालमेल बनाकर पार्टी की सदस्यता लेने से लेकर पदाधिकारी तक बन जाते हैं। जिले में एक-दो नहीं दर्जनों ऐसे लोग हैं, जो लूट, हत्या, हत्या का प्रयास, गैंगेस्टर के वांछित होते हुए भी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हैं। इनमें मौजूदा समय में सियासी पदों पर आसीन कुछ लोगों का नाम भी शामिल है। ताजा मामलों पर नजर डाली जाए तो भदोही के बहुचर्चित बूचड़खाना संचालन का आरोपी रहा।
भाजपा सदस्यता का फायदा उठाकर पशु तस्करी, बूचड़खाना संचालन आदि कराता रहा। मुकदमा दर्ज होने के दो माह बाद भी पुलिस अब तक उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी। यह तो बानगी भर है। ऐसे और भी कई लोग हैं, जो छिपे बैठे हैं। कानपुर की घटना के बाद पुलिस भले ही अलर्ट हुई है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे लोगों के गिरेबां पर पुलिस हाथ डाल पाती है या नहीं। पुलिस अधीक्षक रामबदन सिंह ने कहा कि शासन के निर्देश पर हिस्ट्रीशीटर और इनामी अपराधियों की नई सूची बनाई जा रही है।