ज्ञानपुर। विशेष न्यायाधीश एससी एसटी असद अहमद हाशमी की अदालत ने दुष्कर्म एवं दलित उत्पीड़न के दोषी को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। गोपीगंज के एक गांव में हुई घटना में कोर्ट ने 16 महीने में फैसला सुनाया है। मुआवजे की पचास फीसदी धनराशि पीड़ित छात्रा को दी जाएगी।
अभियोजन के मुताबिक गोपीगंज के एक गांव निवासी छात्रा ने तहरीर दी थी कि वह बीएससी की छात्रा है। डेढ़ साल पूर्व वह गोपीगंज के अलीनगर के निवासी अफरीदी से फेसबुक के जरिए संपर्क में आई। 30 जुलाई 2022 को सुबह आठ बजे उसने फोन किया और कहा कि शक्ति ढाबा में कैंप लगा है। इसमें पढ़े-लिखे लोगों को रोजगार दिया जाएगा। घर से निकलने के बाद वह बाइक से शक्ति ढाबा लेकर गया। वहां पहुंचने के बाद उसने अंदर जाने को कहा। होटल वाले से बात करने के बाद वह आया और कहा कि ऊपर चलना है। एक रूम में लेकर गया और कहा कि अभी अन्य लोग आ रहे हैं। उसने मुझे एक पेय पदार्थ पिलाया। उसके बाद वह बेहोश होने लगी। उसने जबरदस्ती दुष्कर्म किया।
वह बेहोश हो गई। अस्पताल में उपचार के बाद स्थिति में सुधार हुआ। किसी तरह घर वालों को फोन किया। पुलिस ने दुष्कर्म और एससी एसटी आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में भेजा। जहां दोनों पक्षों के तर्क एवं बहस सुनने के बाद न्यायाधीश असद अहमद हाशमी ने आफरीदी को दोष सिद्ध पाया और में 10 साल और एससीएसटी एक्ट में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 50 हजार अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की आधी राशि पीड़िता को देने का भी आदेश दिया। अभियोजन की तरफ से पैरवी विशेष लोक अभियोजक अनिल शुक्ला ने की।