उद्योगों को बढ़ावा देने के शासन के प्रयासों को उद्योग विभाग ही पलीता लगा रहा है। डेढ़ दशक पूर्व जिन 33 लोगों को उसने उद्योग लगाने के लिए लीज पर जमीन दी थी उसमें से एक को छोड़ कर कहीं भी कोई उद्योग नहीं चल रहा है। लाभार्थी इन भूखंडों पर मकान बनवाकर उनसे किराया उगाह रहे हैं या फिर खेती कर रहे हैं वहीं कुछ भूखंड वैसे ही खाली पड़े हैं और यह सब उद्योग विभाग की नाक के नीचे हो रहा है। पर विभाग के अधिकारी मात्र पत्र भेज कर शांत बैठे हुए हैं।
वर्ष 1997-98 में सरकार ने कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए छोटे उद्यमियों को जमीन लीज पर देने की योजना जिले में शुरू की थी। योजना में लाभार्थी को मात्र 1300 रुपए सालाना टैक्स के रूप में उद्योग विभाग को देना था। जिले के अलावा गैर जनपद के 33 लोगों ने उद्योग विभाग के मिनी इंडस्ट्रियल एरिया में जमीनें लीज पर लीं। करीब डेढ़ दशक से अधिक का समय गुजर गया लेकिन एक लाभार्थी जखांव निवासी रमेश पांडेय को छोड़ किसी ने यहां उद्योग शुरू नहीं किया। कुछ लाभार्थियों ने उद्योग के लिए लीज पर ली जमीनों पर भवन बनाकर उसे किराए पर दे दिया तो कुछ उन जमीनों पर खेती करवा रहे हैं। कई जमीनें वैसे ही खाली पड़ी हैं। विभागीय दफ्तर से चंद कदम पर दूर बने इन भवनों के बारे में जानते हुए भी विभाग चुप्पी साधे है। ऐसे में शासन के उद्योगों को बढ़ाने के सपनों पर ग्रहण लगता दिख रहा है। लोगों का कहना है कि इन जमीनों पर कारखाने लगते तो कई लोगों को रोजगार मिलता।