मानसून के अच्छे संकेत को देखते हुए किसान नर्सरी की तैयारी में जुट गए हैं, हालांकि उन्हें खाद-बीज के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। खाली सहकारी समितियां किसानों की परेशानी को बढ़ाएंगी। समितियों पर खाद-बीज न मिलने से एक बार फिर किसानों को निजी दूकानों के सहारे खेतीबारी करनी पड़ेगी।
तीन फसली सीजन से मौसम की मार सह रहे किसानों को मौसम वैज्ञानिकों ने इस बार अच्छी खबर सुनाई है। मानसून के अच्छे संकेत को देखते हुए किसान नर्सरी डालने की तैयारी अभी से कर दी है। खाली खेतों की जुताई आदि कराकर उसमें देशी खाद को डालकर बेहतर बना रहे हैं। 10 से 12 दिनों के बाद धान की नर्सरी किसान डालने लगेंगे लेकिन जिले की चालू 42 सहकारी समितियों में खाद-बीज नहीं है। इससे किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। कृषि विभाग की ओर से धान का भरपूर बीज होने का दावा किया जा रहा है लेकिन सभी पुराने बीज की वेयरायटी हैं। नई वेरायटी विभाग के पास नहीं है। सहकारी समितियों पर डाई और पोटाश न होने से किसानों को निजी दूकानों से उंचे दामों पर ही खरीदना पड़ेगा। एआर कोआपरेटिव विमल शुक्ला ने बताया कि 300 एमटी डाई गोदामों में रखी गई है। नर्सरी में डाई की कमी नहीं होगी।