ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सूबे का 25वां राज्य विश्वविद्यालय होगा। सोमवार को अंतरिम कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसके विस्तार का रास्ता साफ हो गया। इससे लंबे समय से चल रही मांग भी पूरी होने की उम्मीद बढ़ गई है। पूर्व में राजस्व विभाग से नापी कराने के बाद महाविद्यालय के पास खुद की 63 एकड़ जमीन मिली थी। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफसर रमेश यादव ने बताया कि विश्वविद्यालय बनने से शैक्षणिक विकास होगा। इसका युवाओं को लाभ मिलेगा।
काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय को लंबे समय से विश्वविद्यालय बनाए जाने की मांग हो रही है। एक अगस्त 1951 को स्थापित इस महाविद्यालय ने 75 साल में उच्च शिक्षा में मानकों को स्थापित किया।
बीते दिनों जिले के दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 एकड़ जमीन की उपलब्धता होने पर महाविद्यालय को राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने का वादा किया था। उन्होंने जिला प्रशासन से जमीन तलाश करने का निर्देश दिया। सीएम के आदेश के बाद डीएम शैलेश कुमार ने स्थानीय स्तर जमीन की तलाश कराई। राजस्व टीम की टीम की ओर से केएनपीजी के जमीन की मापी कराई गई। महाविद्यालय के पास खुद की लगभग 63 एकड़ जमीन है। जमीन की उपलब्धता के बाद जिलाधिकारी ने शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग की टीम महाविद्यालय का निरीक्षण कर चली गई। सोमवार को विधानसभा की अंतरिम कैबिनेट की बैठक में महाविद्यालय को राज्य विश्वविद्यालय बनाने पर मुहर लगाई गई।
महाविद्यालय के पास है इतनी जमीन
काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पास जोरई, वेदपुर, ददरहां महाविद्यालय के जीर्ण-शीर्ण भवन को मिलाकर 15.56 हेक्टेयर यानी 38.5 एकड़ भूमि है। महाविद्यालय का मुख्य व प्रशासनिक भवन 3. 380 हेक्टेयर यानी 3.35 एकड़ और वेदपुर में ही 6.668 हेक्टेयर यानी 16.50 एकड़ महाविद्यालय की जमीन वेटेनरी कॉलेज के नाम से दर्ज है। इस पर अब तक किसी प्रकार का कोई निर्माण नहीं हो सका है।
काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जिले के छात्रों के लिए वरदान रहा है। इसे विश्वविद्यालय बनाएं जाने से जिले के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए भटकना नहीं होगा। - राकेश दुबे, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, केएनपीजी।
केएनपीजी को विश्वविद्यालय बनाए जाने से लंबे समय से चल रहे छात्रों का संघर्ष और त्याग फलीभूत हो रहा है। इसके लिए सभी छात्र बधाई के पात्र हैं। अब उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को दूसरी जगह नहीं जाना होगा। - शिवम शुक्ला, विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति।