प्रोफेसर बोले
यह एक ऐतिहासिक क्षण है। सभी के अथक परिश्रम, समर्पण और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। कॉलेज से विश्वविद्यालय तक का यह सफर शिक्षण, अनुसंधान और सामुदायिक सेवा के क्षेत्र में इस महाविद्यालय की उत्कृष्टता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। -डॉ. अजय कुमार, विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान
केएनपीजी का विश्वविद्यालय बनना अत्यंत गौरवशाली और ऐतिहासिक क्षण है। इससे छात्रों की प्रतिभा को नया आयाम मिलेगा। शोध और नवाचार की दिशा में सकारात्मक कदम है। -संजय चौबे, बीएड विभाग
काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पास जोरई, वेदपुर, ददरहां महाविद्यालय के जीर्ण-शीर्ण भवन को मिलाकर 15.56 हेक्टेयर यानी 38.5 एकड़ भूमि है। महाविद्यालय का मुख्य व प्रशासनिक भवन 3.380 हेक्टेयर यानी 3.35 एकड़ और वेदपुर में ही 6.668 हेक्टेयर यानी 16.50 एकड़ महाविद्यालय की जमीन वेटरनरी कॉलेज के नाम से दर्ज है। इस पर अब तक किसी प्रकार का कोई निर्माण नहीं हो सका है।
केएनपीजी का सफरनामा
- एक अगस्त 1951 : काशी नरेश ने रखी आधारशिला।
- अब तक संबद्धता : आगरा विश्वविद्यालय (1951-1959), गोरखपुर विश्वविद्यालय (1959-1988), पूर्वांचल विवि जौनपुर (1988-1995), काशी विद्यापीठ, वाराणसी (1995-2025) व विंध्याचल विवि (2025)।
- 22 सितंबर, 2025 : विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत महाविद्यालय को विवि बनाने के लिए कैबिनेट की स्वीकृति।
- 30 अक्तूबर, 2025: नए विश्वविद्यालय के रूप में उन्नत करने के प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दी।
- 15 जनवरी, 2026: 26वां राज्य विश्वविद्यालय बना केएनपीजी।
- 6000 विद्यार्थी
- नैक का बी ग्रेड
- 117 प्राध्यापक
- 89 तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
- 19 विषयों की पढ़ाई
केएनपीजी कॉलेज में ये हैं सुविधाएं
स्मार्ट क्लास, मल्टीपरपज हॉल, लैब, पुस्तकालय, ई-लाइब्रेरी, आर्यभट्ट, भास्कर व ओबीसी छात्रावास हैं। खेल, एनसीसी, एनएसएस, रोवर्स-रेंजर्स व स्काउट गाइड जैसी व्यवस्थाएं हैं।
बोले छात्र
वर्षों से केएनपीजी को विश्वविद्यालय बनाने की मांग चल रही थी। विश्वविद्यालय बनने के बाद अब हमें आगे की पढ़ाई के लिए बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। -धीरज दुबे, एमए, तृतीय सेमेस्टर
विश्वविद्यालय बनने के बाद शैक्षणिक माहौल बेहतर होगा। वहीं, गुणवत्तापरक शिक्षा मिलने के साथ-साथ कुछ प्रोफेशनल कोर्स भी शुरू होंगे। छात्रों को बाहर नहीं जाना होगा। -अनुज कुमार, एमए, द्वितीय सेमेस्टर
अधिकारी बोले
विश्वविद्यालय बनना बेहद ही गौरव का विषय है। महाविद्यालय की अब तक की शैक्षणिक यात्रा काफी गौरवशाली रही है। विश्वविद्यालय बनाए जाने के बाद अब विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर बनेंगे। -प्रो. रमेश चंद्र यादव, प्राचार्य, केएनपीजी
राज्यपाल के अनुमोदन के बाद केएनपीजी अब 26वां राज्य विश्वविद्यालय बन चुका है। विश्वविद्यालय बनाए जाने के बाद अब जिले के शैक्षणिक परिवेश में सुधार आएगा। वहीं, युवाओं के लिए बेहतर अवसर बनेंगे। -शैलेश कुमार, जिलाधिकारी