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जागरुकता के अभाव में परवान नहीं चढ़ पा रही केसीसी योजना

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ज्ञानपुर। विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों और पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई केसीसी योजना जागरूकता के अभाव में परवान नहीं चढ़ पा रही है। अब तक किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों को केसीसी योजना का लाभ देने के लिए पर्याप्त संख्या में आवेदन ही नहीं मिल पाया है। इसमें बैंकिंग प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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कोविड-19 काल में भी संबंधित विभाग को लक्ष्य हासिल करने में पसीना छूट रहा है। बैंकिंग कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, जिसकी नजीर पशुपालन और मत्स्य विभाग के संदर्भ में देखने को मिल रहा है। दोनों विभागों को शासन स्तर से कोविड-19 में बेरोजगारी का दंश झेल रहे बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर केसीसी बनवाने का लक्ष्य तो दे दिया गया, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा से योजना की जानकारी उन लोगों तक नहीं पहुंच सकी कि लोग लाभान्वित हो सकें। मत्स्य पालक शिव कुमार, रमेश कुमार, हरेंद्र कुमार, किसान देवेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, मोतीलाल ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विभागीय स्तर पर लक्ष्य हासिल करने का दंभ तो भरा जा रहा है, लेकिन नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक केसीसी योजनाओं को भुनाने के लिए न अधिकारी ही कभी दिखाई देते हैं न कर्मचारी। जबकि जिले में लगभग 60 हजार से अधिक प्रवासी विभिन्न प्रदेशों से आकर रोजी-रोटी के लिए परेशान हैं। यदि जागरूकता के नाम पर केसीसी ही नहीं बल्कि अन्य योजनाओं का भी प्रचार-प्रसार कराया जाता रहे तो लोगों का झुकाव भी बढ़ता रहेगा। प्रभारी सीवीओ डॉ. जेडी सिंह ने कहा कि पशुपालन विभाग को शासन स्तर से 1426 केसीसी बनवाने का लक्ष्य मिला है, जिसमें से अब तक 250 पशुपालकों का ही आवेदन मिल पाया है। विभाग के तहत औराई, भदोही और सदर तहसील अंतर्गत चल रहे 11 पशु अस्पतालों में नि:शुल्क आवेदन उपलब्ध कराकर प्रभारी चिकित्सकों से अधिक संख्या में लोगों को लाभ दिलाने का निर्देश दिया है। सहायक नि देेशक मत्स्य पारस सिंह ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष मात्र 60 केसीसी का लक्ष्य मिला है, बावजूद इसके अभी तक 13 आवेदन ही मिल पाए हैं। अग्रणी जिला प्रबंधक यूबीआई उमेश कुमार का कहना रहा कि जैसे-जैसे आवेदन मिल रहे हैं। वैसे-वैसे संबंधित बैंकों से लाभार्थियों के नाम केसीसी कार्ड बनाकर वितरण कराने की योजना तैयार की जा रही है।
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