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Bhadohi News: रामलला के दर्शन को पैदल ही जाएंगे कारसेवक

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ज्ञानपुर। अयोध्या में रामलला के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है रामभक्तों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। कारसेवा करने वाले आह्लादित हैं। बुजुर्ग कारसेवकों में नई ऊर्जा का संचार हो गया है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद जिले के तीन कारसेवक रामलला के दर्शन के लिए पैदल ही अयोध्या जाएंगे।
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कांवल निवासी डॉ. रामविलास की उम्र 62 साल है। वे बताते हैं कि उस समय बेहद सख्ती के बावजूद रामभक्त बाधाओं को पार करते हुए अयोध्या पहुंच गए। 60 वर्षीय कारसेवक कृष्ण कुमार मिश्रा कौलापुर के निवासी हैं। उन्होंने कहा कि रामलला अपने मंदिर में विराजमान होंगे, यह सोचकर रोमांच हो रहा है। 54 वर्षीय सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि कारसेवा के दौरान हम लोगों ने पैदल सैकड़ों किमी की यात्रा की थी। बाबरी विंध्वंस के दौरान हम लोग अपने साथ वहां से ईट-पत्थर घर लेकर आए थे। हमने संकल्प लिया है कि 22 जनवरी को जब रामलला मंदिर में विराजमान होंगे तो हम लोग घर में दिवाली मनाएंगे। इसके बाद रामलला के दर्शन के लिए यहां से पैदल ही अयोध्या जाएंगे।
कारसेवकों ने बताया कि 1989 में जब हम लोग अयोध्या में कारसेवा के लिए निकले तो चप्पे-चप्पे पर पुलिस की निगरानी थी। पूर्व विधायक लालचंद पांडेय के नेतृत्व में बनौली महाराजगंज निवासी लालजी दुबे, कौलापुर निवासी सूर्य दत्त चतुर्वेदी, वीरेंद्र चतुर्वेदी, कृष्ण कुमार मिश्रा, सुनील श्रीवास्तव मोढ़ रेलवे स्टेशन से प्रतापगढ़ पहुंचे। वहां से तीन दिनों की पैदल यात्रा कर अयोध्या पहुंचे थे। पुलिस की लाठीचार्ज में घायल हो गए। 6 दिसंबर 1992 की कारसेवा में शामिल हुए और एक-एक ईंट अपने घर ले प्रतीकचिह्न समझ कर ले आए। संकल्प लिया कि प्रभु श्रीराम का मंदिर बनने के बाद पैदल दर्शन को आएंगे।
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