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कामधेनु डेयरी से तबाह हुए पशुपालक

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ज्ञानपुर/दुर्गागंज। सपा सरकार की महत्वाकांक्षी कामधेनु डेयरी योजना को शुरू करने वाले संचालक, अफसरों के मकड़जाल में उलझकर तबाह हो रहे हैं। छुट्टा मवेशियों को भी संचालकों के यहां बांध दिया गया, लेकिन मिलने वाली सहायता राशि दो साल बाद भी नहीं मिली। ऐसे में उनके संरक्षण पर भी मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। कमाई और खर्च में बड़ा अंतर होने से अभोली के पशुपालक नागेंद्र सिंह ने अब तक आठ बीघे जमीन बेच दी।
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गौ संरक्षण की मुहिम का अफसर ही पलीता लगा रहे हैं। अधिकारियों की उदासीनता से कामधेनु डेयरी संचालक अर्श से फर्श पर आ गए। अभोली ब्लॉक के सदौपुर गांव निवासी नागेंद्र बहादुर सिंह का 2014 में कामधेनु डेयरी योजना के तहत चयन हुआ था। इसमें 90 लाख रुपये बैंक से पांच साल तक ब्याज मुफ्त दिया गया, हालांकि हर महीने डेढ़ लाख जमा करना था। इसमें पशुपालक ने 30 लाख की मार्जिन मनी लगाई। शुरू में दूध का उत्पादन अधिक था, लेकिन कीमत कम होने से खर्च और लागत बराबर ही रही। अच्छे दुग्ध उत्पादन के कारण पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं। 2016-17 में हुदहुद तूफान के कारण भूसे का संकट बढ़ा। 10 रुपये किलो भूसा खरीदकर गायों का संरक्षण किया।
भाजपा सरकार बनने पर पशुपालन विभाग ने डेयरी पर 50 से अधिक छुट्टा मवेशी भी बांध दिए, लेकिन ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की भ्रष्टाचारी नीति के कारण आज तक खाता नहीं खुल सका। इससे सरकारी प्रोत्साहन राशि न मिलने से वह प्रतिदिन अपनी जेब से ही मवेशियों का खर्च उठाते रहे। आलम यह हुआ कि दो साल के अंदर उन्हें आठ बीघे पुश्तैनी जमीन बेचनी पड़ गई। अब स्थिति यह हो गई है कि वह स्वयं भुखमरी के कगार पर आ चुके हैं। प्रभारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेपी सिंह ने कहा कि पशुपालक को शुरुआती समय में ही सुधार के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। अब स्थिति विकट हो चुकी है। उच्चाधिकारियों से बात कर रास्ता निकाला जाएगा।
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