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फर्जी अभिलेख से हासिल की नौकरी, दो शिक्षक बर्खास्त

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ज्ञानपुर/लालानगर। बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की नियुक्ति में धांधली थम नहीं रही है। दूसरे के अभिलेख से नौकरी कर रहे एक शिक्षक और एक शिक्षिका को बीएसए ने बर्खास्त कर दिया। शिक्षक आशुुतोष त्रिपाठी के खिलाफ बुधवार को गोपीगंज थाने में जालसाजी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। दोनों से वेतन की रिकवरी का आदेश दिया गया।
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प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पठन-पाठन के लिए हर साल शासन स्तर से शिक्षकों की नियुक्त की जाती है। एक साथ 60 से 70 हजार शिक्षक भर्ती में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी प्राप्त कर लेते हैं। सत्यापन में जब तक मामला सामने आता है तब तक वे चार से पांच साल की नौकरी पूर्ण कर लेते हैं। मूल रूप से गाजीपुर निवासी आशुतोष त्रिपाठी ने वर्ष 2010 में शिक्षक की नौकरी प्राप्त कर ली। प्राथमिक विद्यालय पुरवां में तैनाती हुई। वर्तमान में वह बेरासपुर प्राथमिक विद्यालय में तैनात थे। तिनसुखिया असम के केंद्रीय विद्यालय में कार्यरत एक व्यक्ति ने शिक्षा विभाग में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराया कि उसके नाम का फर्जी दस्तावेज तैयार कर आशुतोष त्रिपाठी नौकरी कर रहे हैं। विभागीय जांच में मामला सही पाया गया। जिसको संज्ञान में लेते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक को बर्खास्त कर वेतन रिकवरी का आदेश दिया।
बुधवार को खंड शिक्षा अधिकारी डीघ रविंद्र कुमार शुक्ल ने गोपीगंज कोतवाली में जालसाजी सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। प्राथमिक विद्यालय कंसापुर में दूसरे के अभिलेख पर नौकरी कर रही प्रेमलता त्रिपाठी को भी बर्खास्त किया गया। वह मूल रूप से देवरिया की रहने वाली हैं। वर्ष 2010-11 में नियुक्ति हुई थी। खंड शिक्षा अधिकारी केडी पांडेय ने कहा कि तहरीर दी गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा कि शासन स्तर से एसटीएफ जांच कर रही है। उसी की जांच में मामला सामने आया। जिस पर कार्रवाई की गई। बताते चलें कि वर्ष 2015 में सत्यापन के दौरान जिले के डीघ ब्लॉक के वैंकुठपट्टी, प्राथमिक विद्यालय मोढ़ समेत चार स्कूलों के शिक्षकों के सीटेट के अभिलेख फर्जी पाए गए थे। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने चारों शिक्षकों को बर्खास्त कर मुकदमा दर्ज कराया था।
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