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Bhadohi News: पट्टा निरस्तीकरण के 48 साल बाद भी आदेश का अनुपालन न होने पर बैठी जांच

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ज्ञानपुर। भदोही तहसील के चकजिवरानी गांव में एक बीघा छह बिस्वा जमीन पर नियम विरूद्ध पट्टे के निरस्तीकरण के आदेश के 48 साल बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं होने पर मंडलायुक्त ने जांच बैठा दी है। तालाब और ऊसर की जमीन को तत्काल सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराने और आदेश के अनुपालन में देरी करने वाले दोषियों के खिलाफ जांच करके 30 अप्रैल तक रिपोर्ट मांगी है। मंडलायुक्त ने हर हाल में 15 मई तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है। वहीं, उस जमीन को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया है। भदोही तहसील की चकजिवरानी साल 1969 में वाराणसी जिले के ज्ञानपुर तहसील का हिस्सा थी। चकजिवरानी गांव निवासी रहमतुल्ला ने तत्कालीन ग्राम प्रधान को अपने पक्ष में करके नियम विरूद्ध तरीके से एक बीघा छह बिस्वा सरकारी जमीन का पट्टा करा लिया, जबकि वह जमीन तालाब और ऊसर में अंकित है। इसके बाद उसने उस जमीन का कुछ हिस्सा लोगों को बैनामा भी कर दिया। मामले की शिकायत हुई तो जांच बैठाई गई। जांच में पता चला कि भूमि प्रबंधक कार्रवाई रजिस्टर में रहमुल्लाह भूमिहीन है। इसी आधार पर उसे पट्टा दिया, लेकिन हकीकत है कि उसने प्रधान को अपने पाले में लेकर साजिशन पट्टा प्राप्त किया। उसे भूमि की जरूरत नहीं थी। इस कारण उसने पट्टे की जमीन को बेचा। जांच के बाद साल 1978 में तत्कालीन निगरानी न्यायालय अतिरिक्त जिलाधिकारी (प्रशासन) वाराणसी ने उक्त पट्टे को निरस्त कर दिया था। इसके बाद से आज तक उक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। मामला मंडलायुक्त न्यायालय में पहुंचा। जिसमें उन्होंने पाया कि उक्त जमीन सरकारी तालाब व ऊसर की है। पट्टा निरस्तीकरण के आदेश के बाद अब तक उसका अनुपालन नहीं हो सका। इसके बाद मंडलायुक्त ने निगरानी याचिका को निरस्त करते हुए इसकी जांच एडीएम को सौंपने के निर्देश दिए।
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मंडलायुक्त ने इन बिंदुओं पर जांच के दिए आदेश
मंडलायुक्त राकेश राजेश ने मामले की जांच के लिए एडीएम को नामित करने का आदेश डीएम को दिया है। इसमें उन्होंने साल 1978 में हुए आदेश का राजस्व अभिलेखों में विधिवत अनुपालन हुआ है कि नहीं, इसका पता लगाने के लिए निर्देश दिए। कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ है तो तत्काल अभिलेखों में सरकारी भूमि सही अंकित किया जाए। वहीं, आदेश के अनुपालन में देरी के लिए उत्तरदायी अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित कर 30 अप्रैल तक रिपोर्ट दी जाए। इससे 15 मई तक उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

आदेश अनुपालन में देरी के कारणों का पता लगाने के लिए एडीएम को जांच सौंप दी गई है। जमीन को जल्द ही अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। जमीन अगर सरकारी अभिलेखों में तालाब या ऊसर के नाम से अंकित नहीं हो सका है तो उसे भी ठीक किया जाएगा। - शैलेश कुमार, जिलाधिकारी।
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