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Bhadohi News: ई-कामर्स के जरिए दुनिया में पहुंचा रहे भारतीय उत्पाद

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भदोही। यूरोपीय बाजारों में भी मंदी है। भारतीय कालीनों का अमेरिका के बार यूरोप ही सबसे बड़ा खरीदार है। इस समय सस्ते होने के कारण यूरोपीय बाजार में जूट के बने भारतीय हस्तशिल्पों की अच्छी मांग है। स्वीडन के आयातक समीर देओलालीकर ने यह बात बतायी। उनके ई-कामर्स प्लेटफार्म पर 190 से अधिक भारतीय लघु उद्यमी सूचीबद्ध हैं। ये केवल भारतीय उत्पादों को ही अपने ई-कामर्स प्लेटफार्म के माध्यम से वैश्विक बाजार में उपलब्ध कराते हैं।
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देवलालीकर भारतीय मूल के नए उद्यमी हैं लेकिन स्वीडन की नागरिकता हासिल कर चुके हैं। पिछले दिनों वे भदोही में यहां के उत्पाद का जायजा लेने आए थे। उन्होंने कहा कि विश्व बाजार में सस्ते हस्तशिल्प उत्पादों की अच्छी मांग है। यूक्रेन-रूस, इस्राइल-हमास, ईरान-इस्राइल के बीच युद्ध के हालात ने काफी हद तक हस्तशिल्प के उत्पादों को प्रभावित किया है। देओलालीकर ने स्वीडन में कालीन, हस्तशिल्प और खिलौनों की बिक्री के लिए ई-कामर्स प्लेटफार्म शुरू किया है। वे अपने ई-कामर्स प्लेटफार्म पर केवल भारत के बने उत्पाद ही बेचते हैं। उन्होंने ज्यादातर लघु उद्यमियों को ही सूचिबद्ध किया है।
साफ्टवेयर इंजीनियर देओलालीकर ने बताया कि भारतीय मूल का होने के कारण वे अपने ई कामर्स प्लेटफार्म के माध्यम से भारतीय उत्पादों को ही बढ़ावा देते हैं। लघु उद्यमियों को विदेशों से आर्डर मिलने के बाद भी निर्यात के अड़चनों में नहीं पड़ना पड़ता है। वे कालीन की बिक्री में भी मददगार हैं। उनका यूरोप के 27 देशों के अलावा इंग्लैंड, नारवे, स्विटजरलैंड में काफी अच्छा बाजार बन चुका है। महज तीन साल में ही उनके यहां से छह गुना बिक्री बढ़ी है।
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