नगर के भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) में हुए पाठ्यक्रम विकास कार्यशाला के अंतिम दिन देशभर से आए प्रमुख शिक्षाविदों ने कारपेट एंड टेक्सटाइल टेक्नोलाजी के बीटेक कोर्स को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। विद्वानों ने राय दी कि छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना लाना और उनमें किसी भी प्रकार के कार्य को अंजाम देने की सलाहियत ला पाना ही किसी कोर्स का उद्देश्य होना चाहिए।
आईआईटी दिल्ली से आए डॉ. आर चट्टोपाध्याय ने राय दी कि किसी भी कोर्स को तैयार करने में उसके वैश्विक उपयोग पर अवश्य ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि विदेशों में भारतीय पहली पसंद बनते जा रहे हैं। नार्थ इंडियन टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन गाजियाबाद के निदेशक डॉ. अरिंदम बसु ने कहा कि कारपेट तकनीक के साथ साथ कोर्स में टेक्सटाइल तकनीक का समावेश होने से ये छात्र कपड़ा उद्योग में भी समाहित होने में सक्षम होंगे।
कार्यशाला में इसी प्रकार के एमटेक कोर्स पर भी व्यापक रूप से चर्चा की गई। मुख्य रूप से डॉ. डीबी शेखावत निदेशक और डॉ. प्रशांत सहायक प्रोफेसर यूपी टेक्सटाइल टेक्नालाजी इंस्टीट्यूट, कानपुर के अलावा निदेशक आईआईसीटी प्रो.केके गोस्वामी, विनय कपूर, भोलानाथ बरनवाल, संजय गोयल, आरके मलिक, डॉ. एसके पाल, आर कर्माकरस, राजीव बोथरा, राजेश कुमार आदि ने भी विचार व्यक्त किए।