दुर्गागंज। अभोली ब्लाॅक के मतेथू गांव में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर पर चल रहे चार-दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथावाचक पंडित रमाकांत महाराज जी ने भरत चरित्र प्रसंग का वर्णन किया।
श्रीराम कथा का श्रवण करने के लिए आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा और भरत मित्रता की कथा सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई। उन्होंने भरत के मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम और वात्सल्य भाव के कई प्रसंग सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। बताया कि भ्रातृत्व प्रेम किसी का है तो वह भरत का। वर्तमान समय में भरत चरित्र की बहुत बड़ी प्राथमिकता है।
स्वार्थ के कारण आज भाई-भाई जहां दुश्मन जैसा व्यवहार करते हैं, वहीं भरत चरित्र त्याग, संयम, धैर्य और ईश्वर प्रेम का दूसरा उदाहरण है। भरत का विग्रह श्रीराम की प्रेम मूर्ति के समान है। जिससे भाई के प्रति प्रेम की शिक्षा मिलती है। इस मनुष्य जीवन में भाई व ईश्वर के प्रति प्रेम नहीं है, तो वह जीवन पशु के समान है।
कहा कि सभी को भरत और श्रीराम से भाई व ईश्वर प्रेम की सीख लेनी चाहिए। इस मौके पर आचार्य विनय कुमार पाठक, प्रेमशंकर पाठक, नागेन्द्र बहादुर सिंह, सुनील कुमार सिंह, त्रिभुवन नाथ तिवारी, कृष्णकांत पाठक आदि रहे।