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उलेमा ने बुजुर्गो से निस्बत का मुसलमानों को दिया दर्श

Mon, 08 Feb 2016 02:15 AM IST
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
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शायरों ने शान में कलाम पेशकर उनके आला मरतबे को बताया। इशा बाद शुरू जलसा भोर तक चलता रहा।
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सुल्तानपुर से आए मौलाना शकील अहमद मिस्बाही ने कहा कि मुसलमानों के लिए नमाज सबसे अहम है।

 यह किसी भी हालत में माफ नहीं है, जब तक इंसान के अंदर सोचने समझने की कुवत है। रसूले पाक से मुहब्बत और नमाज कायम करके खुदा को राजी किया जा सकता है।

भारतगंज के नाबीना हाफिज मंजूर ने भी खुदा, रसूल और गौसे आजम पर रोशनी डाली। उन्होंने बुजुर्गो से निस्बत रखने के लिए दर्श भी दिया। कहा कि रसूल की मोहब्बत और निस्बत का दर्श हमें वलियों के आस्ताने से मिलता है।

उन्होंने गौसे आजम के बचपन से लेकर तमाम वाकयात बयान किया। शायर हाफिज महताब, सर्फुद्दीन, हाफिज अब्दुल सलाम, फरीद औरंगाबाद, शब्बीर जफर मुजफ्फर पुर, हाफिज हाशिम ने नात, मनकबत और हम्द पाक का कलाम पेशकर जलसे में सामईन को झुमाते रहे।
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इसके पूर्व तिलावते कुरआन से हाफिज हाशिम ने आगाज, जलसे का निजामत कारी निसारूल हक ने किया। इस मौके पर सपा नेता शकील दादा,जुल्ले बाबा, मोहम्मद इनाम अली, वाहिद अंसारी आदि लोग मौजूद रहे।

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